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आरजेडी ने काटा अहमद अशफाक करीम का राज्यसभा टिकट, संजय व मनोज को बनाया प्रत्याशी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. राजद ने संजय यादव और मनोज झा को राज्यसभा चुनाव के लिए  उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने अपने ऑफिशियल एक्‍स हैंडल से दोनों नेताओं को शुभकामनाएं दी है। राजद ने अहमद अशफाक करीम के स्थान पर संजय यादव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। ये दोनों नेता गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

मालूम हो कि मनोज झा राजद में बड़ा कद रखते हैं। पार्टी ने उन्‍हें एक बार फिर मौका दिया है। वे पूर्व में भी सदन में अपने कई भाषणों को लेकर चर्चा में रहे हैं। बीते साल ‘ठाकुर का कुआं’ कविता के वाचन के बाद उनके खिलाफ कई पार्टियों और राजपूत समाज ने मोर्चा खोला था। हालांकि‍, राजद अपने नेता के बचाव में दृढ़ता के साथ खड़ी रही थी।

कौन है संजय यादव?

मनोज झा का राज्यसभा जाना पहले से करीब-करीब तय माना जा रहा था, लेकिन अशफाक करीम को लेकर शुरू से संशय था। अंतत लंबे मंथन के बाद पार्टी ने मनोज को वापस एक और मौका देने का निर्णय लिया, जबकि संजय यादव की राजनीति में एंट्री हुई। संजय यादव पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के रणनीतिकार माने जाते हैं और लंबे समय से तेजस्वी के साथ काम कर रहे हैं। वे मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं और तेजस्वी यादव के मित्र होने के साथ-साथ इनके राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं। राजनीति में हाथ आजमाने का यह उनका पहला मौका होगा। नामांकन के दौरान तेजस्वी यादव के समेत कई नेता उपस्थित रहेंगे।

भाजपा और कांग्रेस ने इन्‍हें बनाया उम्‍मीदवार

बता दें कि आज बुधवार को भाजपा की ओर से डॉ. भीम सिंह एवं धर्मशीला गुप्ता ने राज्‍यसभा उम्‍मीदवारी के लिए नामांकन का पर्चा भर दिया। विधानसभा में नामांकन के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय सिन्हा के अलावा एनडीए के कई नेता एवं एमएलए मौजूद थे।

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वहीं, भाकपा माले ने राज्‍यसभा सीट की अपनी दावेदारी छोड़ दी और कांग्रेस की ओर से डॉ. अखि‍लेश प्रसाद सिंह को उम्‍मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस अध्‍यक्ष और माले नेता दीपंकर भट्टाचार्य के बीच हुई बातचीत में कटिहार लोकसभा सीट माले को दि‍ए जाने की बात कही जा रही है। बता दें कि पर्चा भरने की अंतिम तारीख 15 फरवरी है। नामांकन पत्रों की संवीक्षा की तिथि 16 फरवरी है। वहीं, नाम वापस लेने की आखिरी तिथि 20 फरवरी है।

साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।