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हाईकोर्ट ने संदेशखाली मामले के आरोपी शेख शाहजहां को दिया आत्मसमर्पण का आदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. संदेशखाली मामले में आज कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में टीएमसी लीडर शेख शाहजहां को गिरफ्तार न करने को लेकर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई. कहा कि यह व्यक्ति ऐसे तो आसानी से भाग नहीं सकता. जाहिर है कानून-व्यवस्था की समस्या रही होगी. चीफ जस्टिस ने कहा कि शेख शाहजहां एक जन प्रतिनिधि हैं. वह कानून की अवहेलना नहीं कर सकते. देखते हैं कि क्या वह कोर्ट के सामने पेश होते हैं या नहीं.

चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि स्वत: संज्ञान मामले में, हम उन्हें यहां आत्मसमर्पण करने का आदेश देते हैं. मामले को करीब 18 दिन से ज्यादा हो गए हैं. एक व्यक्ति जो पूरी समस्या का कारण बना है वह अभी भी भागा हुआ है. हमें नहीं पता कि वो अब तक कैसे बचा हुआ है. पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है. उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार करना होगा. राज्य उसकी रक्षा करना जारी नहीं रख सकता.

पांच जनवरी से फरार है शाहजहां शेख

कलकत्ता हाई कोर्ट ने संदेशखाली के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया था. इसके अलावा इस मुद्दे पर बीजेपी की तरफ से हाईकोर्ट को एप्रोच किया गया था. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस शिवगणनम संदेशखाली के मुद्दे पर गंभीर टिप्पणी की और कहा कि टीएमसी नेता जहां कहीं भी उसे सरेंडर करना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत है. शाहजहां शेख के खिलाफ ईडी अधिकारियों पर हमले के साथ स्थानीय लोगों की जमीन कब्जाने और महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप हैं. शाहजहां शेख पांच जनवरी को संदेशखाली में ईडी पर हमले के बाद फरार है.

ED जारी कर चुकी है तीन समन

संदेशखाली हिंसा के मास्टरमाइंड माने जाने वाले शाहजहां शेख को ईडी की तरफ से तीन समन जारी हो चुके हैं. शेख के फरार होने पर उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया था. 45 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक शाहजहां शेख तक नहीं पहुंच पाई है. ईडी और दूसरी एजेंसियों ने पहले उसके बांग्लादेश भागने की आशंका भी व्यक्त की थी. संदेशखाली हिंसा में शाहजहां शेख के साथ शिबू हाजरा और उत्तम सरदार के नाम सामने आए थे. पुलिस ने अभी तक शिबू हाजरा और उत्तम सरदार को अरेस्ट किया है.

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।