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गूगल ने प्लेस्टोर से हटाए 10 प्रसिद्ध भारतीय एप, भारत सरकार नाराज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली. गूगल ने अपने प्ले-स्टोर से 10 भारतीय एप्स को हटा दिया है। इसके बाद एक नया विवाद शुरू हो गया है। पहले तो उन कंपनियों ने गूगल की इस हरकत को तानाशाही बताया जिनके एप्स गूगल ने हटाए हैं और अब भारत सरकार ने कहा है कि गूगल को भारतीय एप्स को स्टोर से हटाने की इजाजत नहीं है। इस मामले को लेकर अगले सप्ताह सोमवार को एक बैठक बुलाई गई है जिसमें टेक कंपनियां और स्टार्टअप्स शामिल होंगे।

एक इंटरव्यू में आईटी और टेलीकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय इकोनॉमी के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम एक प्रमुख घटक है और उनके भाग्य का फैसला किसी बड़ी टेक कंपनी पर नहीं छोड़ा जा सकता। इस मामले पर वैष्णव ने आगे कहा कि भारत बहुत ही स्पष्ट है, हमारी पॉलिसी बहुत स्पष्ट है। हमारे स्टार्टअप को जिन सुरक्षा की जरूरत है, वो उन्हें मिलेगी। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह सरकार गूगल और एप डेवलपर्स के साथ एक बैठक करेगी और मामले का निपटारा किया जाएगा।

वैष्णव ने कहा, “मैंने पहले ही Google को कॉल कर दिया है। मैंने उन एप डेवलपर्स को पहले ही कॉल कर लिया है, जिन्हें डीलिस्ट कर दिया गया है, हम उनसे अगले हफ्ते मिलेंगे। इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। इस तरह की डीलिस्टिंग की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

गूगल ने प्ले-स्टोर से हटाए 10 पोपुलर एप्स

आपको बता दें कि गूगल ने प्ले-स्टोर से 10 भारतीय एप्स हटा दिए हैं। गूगल ने यह कार्रवाई बिलिंग पॉलिसी को लेकर की है। गूगल का कहना है कि ये एप्स बिलिंग पॉलिसी को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और चेतावनी के बाद भी मनमानी कर रहे हैं। इस लिस्ट में Shaadi, Matrimony.com, Bharat Matrimony, Balaji Telefilms’ Altt (पूर्व में ALTBalaji), Kuku FM, Quack Quack, Truly Madly जैसे एप्स शामिल हैं।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।