शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 05:13:54 PM

तेरईफाटक में हर्षोल्लास के साथ मनी संत रविदास जयंती, निकाली गई भव्य प्रभातफेरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

ललितपुर। “मन चंगा तो कठौती में गंगा” का कालजयी संदेश देने वाले महान संत रविदास जी महाराज की जयंती आज ग्राम तेरईफाटक में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। ‘महाकाल प्रभातफेरी तेरईफाटक’ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भक्ति और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम देखने को मिला।

भक्तिमय प्रभातफेरी में उमड़ा जनसैलाब

कार्यक्रम का शुभारंभ भव्य प्रभातफेरी से हुआ, जो ग्राम तेरईफाटक के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। इस प्रभातफेरी में हजारों की संख्या में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों ने सहभागिता की। भक्ति भजनों के बीच पूरा गांव संत रविदास जी के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

वैचारिक गोष्ठी: महापुरुषों के संदेश को आत्मसात करने पर जोर

प्रभातफेरी के समापन पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता पूर्व शासकीय अधिवक्ता श्री रामनारायण पाठक ने कहा, “संत रविदास जी ने हमें सिखाया कि ईश्वर कण-कण में व्याप्त है। यदि हमारा मन शुद्ध है, तो ईश्वर हमारे पास है। हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और सदैव सत्कर्म करने का संकल्प लेना चाहिए।”

संरक्षक मनोज कुमार तिवारी ‘टाटा भइया’ ने ग्रामीणों का आह्वान करते हुए कहा कि संत रविदास जयंती मनाने की सार्थकता तभी है जब हम अपने भीतर की बुराइयों को त्यागें। उन्होंने तेरईफाटक को एक ‘आदर्श गांव’ बनाने की शपथ दिलाते हुए सामाजिक कुरीतियों को दूर करने पर बल दिया।

मर्यादा पुरुषोत्तम और संत दर्शन का संगम

विशिष्ट अतिथि अनुज भार्गव और डॉ. हृदय नारायण उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रभु राम के जीवन को आत्मसात करना और दूसरों की भलाई के लिए तत्पर रहना ही संत रविदास जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

सम्मान एवं प्रसाद वितरण

कार्यक्रम के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने मुख्य वक्ता श्री रामनारायण पाठक जी का सम्मान किया। समारोह के अंत में मनोज कुशवाहा और केहर राजपूत द्वारा सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर महाकाल प्रभातफेरी समिति के समस्त पदाधिकारी, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।