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अब आरजेडी की सांप्रदायिक सद्भाव में आस्था नहीं है, इसलिए छोड़ रहा हूँ पार्टी : वृषिण पटेल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. लोकसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे में कथित मनमानी से उभरा राजद नेताओं का असंतोष अब बाहर आ रहा है। राज्यसभा के पूर्व सदस्य अशफाक करीम के बाद अब पूर्व मंत्री और राजद के वरिष्ठ नेता वृषिण पटेल ने शनिवार को राजद की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे दिया है। इससे पहले राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने टिकट वितरण में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाकर पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद को पत्र लिखा था।

त्याग पत्र में वृषिण पटेल ने क्या कहा?

प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को भेजे गए त्याग पत्र में वृषिण पटेल ने कहा कि इस पार्टी को समर्पित कार्यकर्ताओं की जरूरत नहीं है। पार्टी की सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सद्भाव में आस्था नहीं है। इस वजह से वह राष्ट्रीय जनता दल की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहे हैं।

अशफाक करीम ने भी लगाए थे गंभीर आरोप

पटेल के पहले लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने से नाराज राजद नेता अशफाक करीम ने राजद से दिया त्याग पत्र दिया था। करीम ने पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद को भेजे त्यागपत्र में कहा है कि वे राष्ट्रीय जनता दल से सामाजिक न्याय को ताकत देने के लिए जुड़े थे, लेकिन पार्टी ने मुसलमान की हाकमारी की है। करीम ने आरोप लगाया है कि उन्हें आबादी के अनुरूप तो दूर सम्मानजनक हिस्सेदारी भी नहीं दी। ऐसी हालत में राजद के साथ राजनीति करना मेरे लिए असंभव है।

…इसलिए नाराज थे अशफाक करीम

अशफाक करीम के पहले नवादा से पार्टी के पुराने नेता राजबल्लभ यादव के भाई विनोद यादव ने टिकट न मिलने के बाद पार्टी के सभी पदों से त्याग पत्र दिया था।

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साभार : दैनिक जागरण

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।