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श्रीकांत शिंदे के माथे पर लिखा है मेरा बाप गद्दार है : प्रियंका चतुर्वेदी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. लोकसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव गुट की नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के एक बयान से सियासी तूफान मच गया है. प्रियंका चतुर्वेदी ने नॉर्थ ईस्ट मुंबई के एक प्रचार अभियान में प्रदेश के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसको लेकर शिंदे गुट के नेता आग बबूला हो गए हैं. शिंदे गुट के नेताओं ने प्रियंका चतुर्वेदी पर हमले करना शुरू कर दिया है.

हाल ही में कांग्रेस छोड़कर शिवसेना शिंदे गुट में शामिल हुए संजय निरुपम ने कहा है यूबीटी की एक महिला सांसद ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण लोकसभा क्षेत्र के उम्मीदवार श्रीकांत शिंदे पर बेहद अभद्र टिप्पणी की है. अगर उन्हें अपने बयान पर शब्दश: विश्वास है तो आदित्य ठाकरे के माथे पर लिखा होना चाहिए मेरा बाप महा गद्दार है.

शिंदे गुट ने कांग्रेस से दोस्ती का दिया हवाला

वहीं शिवसेना शिंदे गुट की प्रवक्ता शीतल म्हात्रे ने प्रियंका चतुर्वेदी पर हमले किया और कहा कि उनका दिमाग सठिया गया है. ध्यान रखो तुमने शेर के मुह में हाथ डालने की कोशिश की है. गद्दारी तो उनके पिता ने बीजेपी से युती तोड़कर की थी. बालासाहेब कांग्रेस के ताउम्र विरोधी थे लेकिन उन्होंने उस पार्टी से हाथ मिलाया.

क्या कहा था प्रियंका चतुर्वेदी ने?

मुंबई की नॉर्थ ईस्ट लोकसभा क्षेत्र में एक चुनाव प्रचार के दौरान शिवसेना उद्धव गुट की नेता और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे पर कड़ी टिप्पणी की थी. प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा था श्रीकांत शिंदे के माथेपर लिखा है. मेरा बाप गद्दार है. एकनाथ शिंदे कौन है? एक गद्दार. उन्होंने आगे कहा कि यह आवाज ठाणे तक पहुंचनी चाहिए.

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प्रियंका चतुर्वेदी ने इस दौरान अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार के एक डायलॉग का नजीर दिया था. उन्होंने कहा था कि एक फिल्म दीवार आई थी. उस फिल्म में अमिताभ बच्चन के हाथ पर लिखा रहता है- मेरा बाप चोर है. श्रीकांत शिंदे के माथे पर लिखा है- मेरा बाप गद्दार है. प्रियंका चतुर्वेदी के इसी बयान पर अब घमासान मचा है.

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।