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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कार्यकर्ता से धुलवाए पैर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले का एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसके बाद वो विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं. अकोला (Akola) में एक कांग्रेस कार्यकर्ता ने नाना पटोले का पैर धोया है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. कार्यकर्ता का नाम विजय गुरव है, जो बुलढाणा जिले के शेगांव का रहने वाला है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले एक कार्यक्रम के लिए अकोला जिले के वाडेगांव आये थे. इसके बाद उन्होंने संत गजानन महाराज (Gajanan Maharaj) की पालकी के दर्शन किये. इस बार उनके पैर कीचड़ से सने हुए थे. इसके बाद एक कार्यकर्ता ने उनके पैर धोये. इसके बाद देखते ही देखते ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

नाना पटोले ने दी ये सफाई

नाना पटोले ने इस पूरे मामले पर अब सफाई दी है. पटोले ने कहा, “पालकी के दर्शन किए तो कीचड़ लग गया, जिस पर कार्यकर्ता ने पानी डाला और मैंने धोया… इसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की कोशिश हो रही है. मैंने तो सामने में कीचड़ धोया, लेकिन ED के जरिए जो अंधेरे में कीचड़ धो रहे हैं उनसे भी सवाल करें.”

कार्यकर्ता ने धोए नाना पटोले के गंदे पैर

जमीन पर कीचड़ होने के कारण नाना पटोले के पैर कीचड़ से सने हुए थे. वह तुरंत नागपुर रवाना होने के लिए अपनी गाड़ी में बैठ गए. इस बीच अपने पैर को धोने के लिए उन्होंने पानी मांगा. जैसे ही नाना पटोले अपनी कार के पास पहुंचे, एक कार्यकर्ता ने उनके गंदे पैर धोए. इस वीडियो के सामने आने के बाद महायुति नेता अमोल मिटकरी ने भी पटोले पर हमला बोला है.

नाना पटोले सोमवार को एक कार्यक्रम के लिए अकोला जिले के वाडेगांव आए थे. यह कार्यक्रम प्रमोद डोंगरे की ओर से उनके जन्मदिन पर अकोला के वाडेगांव में आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम के आयोजन के दौरान निराश्रित महिलाओं के बीच कपड़ों का वितरण किया गया. संत श्री गजानन महाराज की पालकी वाडेगांव में ठहरी थी. निर्धारित कार्यक्रम के बाद नाना पटोले ने वाडेगांव में रह रहे संत श्री गजानन महाराज की पालकी के दर्शन किये.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।