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राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर बच्चों खिलाई कृमि नाशक दवा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चमोली. राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर पूरे जनपद में बच्चों को कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई। राजकीय इंटर कॉलेज गोपेश्वर में प्रधानाचार्य कर्मवीर सिंह ने बच्चों को कृमि नाशक दवा खिलाकर राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का शुभारंभ किया। जिले में 105650 (एक लाख,पांच हजार,छः सौ पचास) बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा एल्बेंडाजोल की गोली खिलाने का लक्ष्य है।

जिला स्वास्थ्य आईईसी अधिकारी उदय सिंह रावत ने बताया कि जनपद चमोली में जो बच्चे कृमि मुक्ति दिवस पर दवा खाने से छूट जाएंगे, उन्हें 18 और 19 सितम्बर को दवा खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल की गोली बच्चों के लिए सुरक्षित दवा है। दवा स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में शिक्षकों एवं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के निगरानी में खिलाई जा रही है। बच्चों में कृमि नियंत्रण से सीधे फायदे खून की कमी में सुधार ,बेहतर पोषण, सीखने की क्षमता में सुधार लाने में मदद, भविष्य में कार्य क्षमता और औसत आय में बढ़ोतरी व वातावरण में कृमि की संख्या कम होने पर जन समुदाय को लाभ मिलता हैं।

किशोर स्वास्थ्य काउंसलर रेखा नेगी ने बताया कि कृमि नियंत्रण की दवाई खाने के साथ-साथ कृमि संक्रमण रोकथाम के लिए स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना भी आवश्यक हैं। विशेषकर बच्चों को नाखून साफ रखें। हमेशा साफ पानी पिए। खाने को ढक कर रखें। साफ पानी से फल ,और सब्जियां को धोया जाए। खुले में शौच न करें। खाने से पहले और शौच के बाद हाथ अवश्य धोएं। उन्होंने बताया कि सभी विभागों के समन्वय से राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का सफल आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के शिक्षक डॉ पीके पांडे, विनय पंत, जानकी परमार, जिला एवोल्यूशन एंड मॉनिटरिंग अधिकारी (मानसिक कार्यक्रम) राजवीर सिंह कुंवर, आरकेएस काउंसलर विक्रम रावत, किरण बिष्ट, रचना समेत स्कूल के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

मा.स./विक्रम सिंह

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।