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भाजपा ने वायनाड सहित उपचुनावों के लिए जारी की प्रत्याशियों की सूची

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. वायनाड के लोकसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नाव्या हरिदास को मैदान में उतारा है, जहां उनका मुकाबला कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा से होगा। पार्टी ने असम, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम के विधानसभा उप चुनावों के लिए भी उम्मीदवारों की सूची जारी की। असम के विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने ढोलाई (अनुसूचित जाति) सीट से निहार रंजन दास, बेहाली सीट से दिंगता घाटोवर और समागुरी सीट से दीप्लु रंजन शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। जबकि बिहार के उपचुनाव में तरारी सीट से विशाल प्रशांत और रामगढ़ सीट से अशोक कुमार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। छत्तीसगढ़ के उपचुनाव में रायपुर शहर दक्षिण सीट से सुनील सोनी को उम्मीदवार बनाया गया है।

वहीं, दक्षिण राज्य कर्नाटक के उपचुनाव में पार्टी ने शिग्गांव से भरत बसवराज बोम्मई और संदूर (अनुसूचित जनजाति) सीट से  से बंगारू हनुमंतु को उम्मीदवार बनाया है। केरल के उपचुनाव में पार्टी ने पलक्कड़ सीट से सी. कृष्णकुमार और चेलक्कारा (अनुसूचित जाति) सीट से के. बालकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। जबकि, मध्य प्रदेश के उपचुनाव में भाजपा ने विजयपुर सीटच से रामनिवास रावत और बुधनी सीट से रमाकांत भार्गव को उम्मीदवार बनाया है। रमाकांत भार्गव 2019 लोकसभा चुनाव में विदिशा सीट सांसद चुने गए थे। राजस्थान की झुंझुनू सीट पर राजेंद्र भांबू और रामगढ़ सीट पर सुखवंत सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है।

राजस्थान की दौसा सीट से जगमनोहन मीणा, देवली उनियारा से राजेंद्र गुर्जर, खींवसर से रेवंत राम डांगा, सलूंबर (अनुसूचित जनजाति) से शांता देवी मीणा को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। वहीं, पश्चिम बंगाल की सिताई सीट (अनुसूचित जाति) से दीपक कुमार रॉय, मदारीहाट (अनुसूचित जनजाति) से राहुल लोहार, नैहाटी से रूपक मिश्रा, हरोआ से बिमल दास, मेदिनीपुर से सुभजित रॉय, तालडांगरा से अनन्या रॉय चक्रवर्ती को उम्मीदवार बनाया गया है।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।