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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान किसानों से हुए नाराज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान नेताओं संग हुई बैठक को लेकर बयान दिया है। सीएम भगवंत मान ने कहा, “मैंने किसानों से कहा कि हर दिन आप ‘रेल रोको’, ‘सड़क रोको’ विरोध प्रदर्शन करते हैं। इससे पंजाब को भारी नुकसान हो रहा है। राज्य को आर्थिक नुकसान हो रहा है। पंजाब ‘धरना’ का राज्य बनता जा रहा है। मेरी नरमदिली को यह मत समझिए कि मैं कार्रवाई नहीं करता। मैं 3.5 करोड़ लोगों का संरक्षक हूं। मुझे सभी का ख्याल रखना है। बैठक में, मैंने उनसे अगले दिन (5 मार्च को) विरोध के बारे में पूछा, और उन्होंने कहा कि यह जारी रहेगा। तो, मैंने उनसे कहा कि आपने मुझे एक घंटे तक क्यों बैठाया?”

भगवंत मान ने किसान आंदोलन पर दिया बयान

उन्होंने कहा कि मैं वास्तव में उठकर चला गया। मैंने उनसे कहा कि मैंने डर के कारण बैठक नहीं बुलाई, मैं उनसे पहले भी मिल चुका हूं, कि मैं आपका दोस्त हूं। लेकिन अगर आप मुझसे कहते हैं कि बैठक के साथ मोर्चा जारी रहेगा, तो मैं बैठक रद्द कर देता हूं और आप मोर्चा जारी रख सकते हैं।” इस बीच पंजाब की भगवंत मान सरकार ने 5 मार्च को प्रस्तावित किसानों के धरने से पहले किसान नेताओं पर बड़ा एक्शन लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से 5 मार्च को चंडीगढ़ में होने वाले धरना प्रदर्शन से पहले कई किसान नेताओं को पंजाब पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने पंजाब के विभिन्न किसान संगठन के नेताओं के घरों पर छापेमारी की है।

सोमवार को लिया एक्शन

बता दें कि सोमवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही थी। बैठक के बेनतीजा रहने के बाद किसानों ने 5 मार्च को चंडीगढ़ में धरना, विरोध प्रदर्शन और मार्च करने का ऐलान किया था। इससे पहले कि किसान चंडीगढ़ कूच कर पाते, पुलिस ने बठिंडा जिले में करीब एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की और कई किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि किसान नेताओं और मुख्यमंत्री के बीच हुई बैठक में काफी तल्खी देखने को मिली थी। किसान नेताओं ने दावा किया था कि ‘नाराज’ मुख्यमंत्री भगवंत मान ‘बिना किसी उकसावे के बैठक से चले गए।’

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।