लोड हो रहा है...

सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील और डबल मीनिंग गाने बजाने पर होगा एक्शन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. अब सार्वजनिक स्थानों पर डबल मीनिंग भोजपुरी गाने बजाने वालों की खैर नहीं है. अब ऐसे गाने बजाने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा, जिसको लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से आदेश दिए गए हैं. बिहार पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को डबल मीनिंग गाने सार्वजनिक जगहों पर बजाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की निर्देश दिए गए हैं.

पुलिस मुख्यालय की ओर से एक सर्कुलर जारी किया गया है, जिसमें इस तरह के गाने बजाने को एक समस्या बताया गया और कहा गया कि ये सामाजिक समस्या बन गई है. कहा गया कि इस तरह के गानों से महिला सुरक्षा में खतरा पैदा होता है. इसके साथ ही ऐसे गानों से छोटे बच्चों की मानसिकता पर भी नेगेटिव असर पड़ता है. बिहार के पुलिस मुख्यालय ने शुक्रवार को सर्कुलर जारी किया.

अश्लील और डबल मीनिंग भोजपुरी गाने

सर्कुलर में राज्य के सभी आईजी, डीआईजी और रेलवे पुलिस को इस आदेश को लागू करने के लिए कहा है. अब बस, ऑटो, ट्रकों और रिक्शा में इस तरह के अश्लील और डबल मीनिंग भोजपुरी गाने बजाकर जो लोग माहौल खराब करते हैं. ऐसे लोगों की पहचान के लिए एक अभियान चलाया जाएगा. अश्लील और डबल मीनिंग भोजपुरी गानों से कई बार महिलाएं अपने आप को असुरक्षित महसूस करती हैं.

ऐसे लोगों पर सख्त एक्शन होगा

पुलिस की ओर से कहा गया है कि जो भी इस नियम का पालन नहीं करेगा. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया जाएगा और कार्रवाई होगी. ये मामला बिहार विधानसभा में भी उठाया जा चुका है. उस समय भी सरकार ने कहा था कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा. पुलिस ने आम जनता से भी इसको लेकर अपील की है कि अगर वह सार्वजनिक जगह पर इस तरह के गाने बजते हुए देखते हैं, तो वह इसकी जानकारी पुलिस को दें, जिससे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.

- Advertisement -

साभार : टीवी9 भारतवर्ष

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।