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पश्चिम बंगाल के बीरभूम में हिंसा के बाद भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के बीरभूम में बीते दिन हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण हैं। कल हुई हिंसा के बाद बीरभूम में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। सतर्कता बरतते हुए सरकार ने 14 मार्च (शुक्रवार) से 17 मार्च (सोमवार) तक सैंथिया शहर के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। दरअसल, बीते दिन यानी होली के पर्व पर बीरभूम जिले के सैंथिया शहर में हिंसा भड़कने की खबरें आई थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलाके में जमकर पत्थरबाजी की गई थी।

इंटरनेट और वॉयस-ओवर-इंटरनेट टेलिफोन सेवाएं निलंबित

जानकारी के मुताबिक, अफवाहों और गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सैंथिया शहर के कम से कम पांच ग्राम पंचायत क्षेत्रों में इंटरनेट और वॉयस-ओवर-इंटरनेट टेलिफोन सेवाओं को निलंबित कर दिया गया है। आदेश में कहा गया कि इंटरनेट और कॉल सेवाओं के निलंबन का कारण ‘अवैध गतिविधियों के लिए अफवाहों’ का फैलना है।

भाजपा ने ममता सरकार को घेरा

इस बीच भाजपा नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं। नंदीग्राम ब्लॉक 2 के अमदाबाद क्षेत्र के कमालपुर में स्थानीय निवासी पिछले मंगलवार से ही पूजा-अर्चना कर रहे थे। जब पूजा और राम नारायण कीर्तन निर्बाध रूप से जारी रहा, तो कुछ लोगों ने श्रीराम के नाम का जाप बर्दाश्त नहीं किया और स्थल पर तोड़फोड़ की और मूर्तियों को अपवित्र कर दिया।

बरुईपुर, जादवपुर और मुर्शिदाबाद में भी हिंसा की घटनाएं

उन्होंने एक्स पर कहा, ‘बरुईपुर, जादवपुर और मुर्शिदाबाद सहित पूरे राज्य में इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी की पुलिस ने बंगाल के कुछ हिस्सों में होली (डोल पूर्णिमा) समारोह पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया, लेकिन बाद में पीछे हट गई।’ उन्होंने कहा कि सनातनियों में व्यापक आक्रोश है, लेकिन इस कठिन समय में भाजपा बंगाल उनके साथ मजबूती से खड़ी है। हम ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल को दूसरा बांग्लादेश बनाने की अनुमति कभी नहीं देंगे।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।