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छत्तीसगढ़ में कुल 40 लाख रुपये के इनामी 22 इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बड़ी खबर है. यहां 22 नक्सलियों ने एक साथ पुलिस और सीआरपीएफ के अफसरों के सामने सरेंडर किया है. इन पर कुल 40 लाख रुपये का इनाम घोषित है. ये सभी नक्सली माड़ डिवीजन और नुआपाडा डिवीजन में सक्रिय रहे हैं.

पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर किया है सरेंडर

प्रदेश में नक्सलियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई के बीच नक्सल संगठन घबराया हुआ है. इस बीच सरकार की पुनर्वास नीति भी नक्सलियों को काफी प्रभावित कर रही है. इस बीच सुकमा में शुक्रवार को एक साथ 22 नक्सलियों ने हिंसा का साथ छोड़कर सरेंडर कर दिया है. इसमें एक दंपति भी शामिल हैं. इन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित है. इनके सरेंडर को पुलिस बड़ी सफलता मान रही है. आत्मसमर्पित 01 पुरूष एवं 01 महिला नक्सली पर 08-08 लाख, 01 पुरूष और एक महिला नक्सली पर 05-05 लाख, दो पुरूष एवं 05 महिला 02-02 लाख, 01 पुरूष नक्सल पर 50 हजार, कुल 40 लाख 50 हजार रुपये का ईनाम घोषित है .

नक्सलियों के पास सुरक्षित ठिकाने नहीं बच रहे

दरअसल प्रदेश को नक्सल मुक्त करने के लिए सरकारें लगातार काम कर रही हैं. नक्सलियों की पुनर्वास नीति नीति से लेकर कई घोषणाएं की गई हैं. जिस तरह से नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, संगठन घबरा रहा है. नक्सलियों के पास छिपने के लिए ठिकाने नहीं बच रहे हैं. सुकमा में एक साथ बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर पुलिस और सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है.

मिलेगा लाभ

नक्सलियों को आत्मससमर्पण हेतु प्रोत्साहित कराने में जिला बल, डीआरजी सुकमा, रेंज फिल्ड टीम (आरएफटी) कोंटा, सुकमा, सीआरपीएफ 02, 74, 131, 217, 219, 223, 226,227,241 और कोबरा 203 वाहिनी की विशेष भूमिका रही है. इन नक्सलियों ने एसपी किरण चव्हाण, सीआरपीएफ के डीआईजी आनंद सिंह राजपुरोहित के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. अफसरों ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास नीति का लाभ और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।