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फ्लिपकार्ट को मिला एनबीएफसी लाइसेंस, अब कंपनी सीधे ईएमआई पर दे सकेगी सामान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. ई-कॉमर्स दिग्गज फ्लिपकार्ट को भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) का लाइसेंस मिल गया है. इससे अब यह कंपनी अपने ग्राहकों को सीधे कर्ज, ईएमआई (EMI) या “बाय नाउ, पे लेटर” जैसी सुविधाएं देने की दिशा में कदम बढ़ा सकेगी. यह मंजूरी मार्च 2025 में दी गई थी, जिसकी अब आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है. हालांकि कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि वह इस लाइसेंस का इस्तेमाल कब और कैसे शुरू करेगी, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम कंपनी को भारत के डिजिटल फाइनेंस मार्केट में और गहराई से उतरने का मौका देगा. फ्लिपकार्ट फिलहाल फेस्टिव सीज़न और बड़ी सेल्स में ईएमआई मॉडल के ज़रिए ग्राहकों को लुभाता रहा है, जो अब वह खुद अपने दम पर कर सकेगा.

क्या है एनबीएफसी लाइसेंस का मतलब?

आरबीआई से एनबीएफसी लाइसेंस मिलने के बाद कोई भी कंपनी फाइनेंस से जुड़ी सेवाएं—जैसे पर्सनल लोन, कंज़्यूमर लोन, इंस्टॉलमेंट फाइनेंसिंग और डेली EMI—सीधे अपने नाम पर दे सकती है. अब तक फ्लिपकार्ट को इसके लिए थर्ड पार्टी लोन कंपनियों या बैंकों का सहारा लेना पड़ता था. लेकिन अब वह अपने दम पर यह सुविधाएं दे पाएगा.

ग्राहकों को क्या फायदा होगा?

  जो ग्राहक अब तक थर्ड पार्टी बैंक के अप्रूवल का इंतजार करते थे, उन्हें अब फटाफट ईएमआई या लोन मिल सकेगा.

  ऐप के भीतर ही सारी फाइनेंसिंग प्रक्रिया पूरी हो सकेगी, जिससे यूजर एक्सपीरियंस बेहतर होगा.

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  खासकर टियर 2 और टियर 3 शहरों में जहां क्रेडिट स्कोर का एक्सेस सीमित होता है, वहां फ्लिपकार्ट की NBFC मॉडल उपयोगी साबित हो सकती है.

फ्लिपकार्ट की पृष्ठभूमि

फ्लिपकार्ट की शुरुआत 2007 में सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने की थी. एक छोटे से ऑनलाइन बुकस्टोर से शुरू होकर यह कंपनी आज भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनियों में से एक बन चुकी है. 2018 में अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट ने इसमें 77% हिस्सेदारी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये में खरीदी थी, जो भारत के स्टार्टअप इतिहास की सबसे बड़ी डील मानी जाती है.

भारत में आईपीओ और स्ट्रक्चर चेंज की तैयारी

2025 की शुरुआत में ही फ्लिपकार्ट ने अपने होल्डिंग स्ट्रक्चर को बदलने का ऐलान किया था. कंपनी अब सिंगापुर से अपने होल्डिंग स्ट्रक्चर को भारत ला रही है ताकि आईपीओ (IPO) की राह साफ हो सके. इससे सरकार की “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” पहल को भी बल मिलेगा.

क्या कहती है कंपनी?

कंपनी ने एक बयान में कहा था— “हम भारत सरकार की दूरदर्शिता और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के माहौल से प्रेरित हैं. हम अपने मुख्य ऑपरेशन्स, भारत की विशाल संभावनाओं और डिजिटल इनोवेशन की ताकत को देखते हुए यह स्ट्रक्चरल बदलाव कर रहे हैं.”

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।