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ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि नये भारत का निश्चय दृढ़ है : राजनाथ सिंह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 20 जून, 2025 को जम्मू और कश्मीर के उधमपुर स्थित उत्तरी कमान में सैनिकों के साथ बातचीत करते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को एक शक्तिशाली संदेश दिया है कि नये भारत का निश्चय दृढ़ है और अब देश आतंकवाद का शिकार नहीं होगा, बल्कि ताकत और रणनीति के साथ जवाब देगा।” उन्होंने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवादी ढांचे को नष्ट करने में सशस्त्र बलों और खुफिया एजेंसियों की सटीकता, समन्वय और साहस की सराहना की और कहा कि आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में बदलाव इस बेजोड़ वीरता और समर्पण का परिणाम है।

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि सीमा पार आतंकवादियों और उनका समर्थन करने वालों के लिए एक चेतावनी बताया कि भारत अब आतंकवाद को और बर्दाश्त नहीं करेगा और अगर देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाया गया तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। यह सिर्फ एक विराम है, एक चेतावनी है। मैं पड़ोसी देश को यह बताना चाहता हूं।”

श्री राजनाथ सिंह ने सैनिक के जीवन को साहस और बलिदान से भरा हुआ बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र हमेशा मातृभूमि के प्रति सशस्त्र बलों द्वारा दी गई सेवाओं का ऋणी रहेगा।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर आयोजित बड़ाखाना में रक्षा मंत्री ने जवानों से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने एक सैनिक के जीवन में शक्ति और स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित किया।उन्होंने कहा, “यदि आप मजबूत हैं, तो हमारी सीमाएं मजबूत होंगी। जब सीमाएं मजबूत होंगी तो भारत भी मजबूत होगा।”

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इस कार्यक्रम में खुखरी नृत्य, भांगड़ा, कलरीपयट्टू और झांझ पटक सहित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा और भारतीय सेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।