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केंद्र सरकार प्रसारण अवसंरचना और नेटवर्क विकास (बीआईएनडी) योजना के तहत उज्जैन में आकाशवाणी केंद्र स्थापित करेगी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने नई दिल्ली में अपने आवास पर मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मेजबानी की।

बैठक में मध्य प्रदेश में चल रही और भविष्य की विकास पहलों से संबंधित मामलों पर ध्यान केंद्रित किया गया। नेताओं ने मीडिया आउटरीच, सार्वजनिक संचार और प्रसारण बुनियादी ढांचे सहित प्रमुख क्षेत्रों में केंद्र और राज्य के बीच सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे केंद्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म मध्य प्रदेश की विकास कहानियों को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।

उज्जैन में नया आकाशवाणी केंद्र

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बैठक में उज्जैन में एक नए आकाशवाणी केंद्र की स्थापना पर भी चर्चा हुई, जिसे केंद्र की ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट (बीआईएनडी) योजना के तहत सहायता दी जाएगी। नए केंद्र का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रसारण को मजबूत करना, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और मध्य प्रदेश के लोगों को समय पर सूचना प्रसारित करना है। बीआईएनडी योजना का उद्देश्य प्रसार भारती को अपने प्रसारण बुनियादी ढांचे के विस्तार और उन्नयन, सामग्री विकास और संगठन से संबंधित सिविल कार्यों से संबंधित खर्चों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

मजबूत प्रसारण अवसंरचना का विकास

दोनों नेताओं ने राज्य में, विशेष रूप से सेवाओं से वंचित और आकांक्षी जिलों में मजबूत प्रसारण अवसंरचना के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बेहतर कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाएं सूचना और सरकारी संचार की राज्य भर में नागरिकों के लिए कोने-कोने तक डिलीवरी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। बैठक का समापन केंद्र और मध्य प्रदेश के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने की आपसी प्रतिबद्धता के साथ हुआ, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे और विकसित भारत के विजन में योगदान दिया जा सके।

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बैठक में मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खंडेलवाल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू, आकाशवाणी की महानिदेशक डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उनकी उपस्थिति ने सरकार के विकास दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में संस्थागत तालमेल के महत्व को रेखांकित किया।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।