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सेल ने ज़ोजिला सुरंग परियोजना में 31,000 टन से अधिक स्टील की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक महारत्न कंपनी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), ज़ोजिला सुरंग परियोजना के लिए सबसे ज़्यादा स्टील आपूर्ति करने वाली कंपनी बनकर उभरी है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना, जो अभी निर्माणाधीन है, भारत की सबसे लंबी सड़क सुरंग और एशिया की सबसे लंबी दो-तरफ़ा सुरंग बनने के लिए तैयार है।

SAIL powers Zojila tunnel with over 31,000 Tonnes of steel 1.jpg

सेल, “ज़ोजिला सुरंग परियोजना” में एक बेहद ज़रूरी पार्टनर है। सेल ने इस परियोजना में 31,000 टन से ज़्यादा स्टील दिया है, जिसमें टीएमटी री-बार, स्ट्रक्चरल स्टील और प्लेट्स शामिल हैं। यह प्रोजेक्ट के 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, और सेल लगातार स्टील सप्लाई कर रहा है, जो कंपनी की अटूट प्रतिबद्धता को दिखाता है। ज़ोजिला सुरंग जैसी बड़ी परियोजनाओं में सेल का योगदान देश के निर्माण में उसकी भूमिका को और मजबूत करता है। ज़ोजिला सुरंग जैसी मेगा-परियोजनाएं सेल स्टील की गुणवत्ता और मजबूती पर हमेशा से भरोसा करती आई हैं, जो कंपनी की गुणवत्ता के प्रति समर्पण और भारत के भविष्य को आकार देने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका का प्रमाण है।

ज़ोजिला सुरंग 11,578 फीट की ऊँचाई पर, हिमालय के मुश्किल पहाड़ों में बनाई जा रही है। यह 30 किलोमीटर से भी अधिक लंबी सुरंग है। यह द्रास और कारगिल होते हुए, श्रीनगर और लेह के बीच, पूरे साल आवाजाही को आसान बनाएगी। यह सुरंग भारत के राष्ट्रीय अवसंरचना विकास, विशेष रूप से श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग, का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे इस इलाके में आम लोगों और सेना दोनों के लिए आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा।

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SAIL powers Zojila tunnel with over 31,000 Tonnes of steel 2 .jpg

यह परियोजना केवल एक रणनीतिक ढांचागत सुविधा ही नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है। सेल की ज़ोजिला सुरंग के लिए स्टील की आपूर्ति, भारत की कई और प्रतिष्ठित ढांचागत परियोजनाओं, जैसे चिनाब रेलवे पुल, अटल सुरंग, बांद्रा-वर्ली सी लिंक, ढोला सादिया और बोगीबील पुलों को बनाने में योगदान देने की कंपनी की लंबी विरासत को और मज़बूत करता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।