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अभिनेत्री पूनम पांडे अब नहीं होंगी लव-कुश रामलीला का हिस्सा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. लाल किला मैदान में आयोजित होने वाली लव कुश रामलीला में मॉडल पूनम पांडे अब मंदोदरी का रोल नहीं करेंगी. इसे लेकर लव कुश रामलीला कमेटी ने मंगलवार (23 सितंबर) को अंतिम फैसला ले लिया है. कमेटी ने इस संबंध में पूनम पांडे को चिट्ठी भी लिखी है. इसमें कमेटी ने साफ किया है कि समाज के कई वर्गों से अलग-अलग प्रतिक्रियाओं के बाद इस साल मंदोदरी का रोल किसी अन्य कलाकार से करवाने का निर्णय लिया गया है.

लव कुश रामलीला कमेटी ने पूनम पांडे को पत्र लिखकर कहा, ”महोदया, लव कुश रामलीला कमेटी की ओर से आपका धन्यवाद कि आपने हमारे निमंत्रण को स्वीकार करते हुए मंदोदरी की भूमिका निभाने की सहमति दी. हम आपके उत्साह व सहयोग की भावना का आदर करते हैं. लेकिन, आपकी सहमति के बाद हमें समाज के कई वर्गों से अलग-अलग प्रकार की प्रतिक्रियाएं मिली.”

‘श्रीराम के संदेश को सही तरीके से पहुंचाना हमारा मकसद’

कमेटी ने आगे कहा, ”हमारी कमेटी का उ‌द्देश्य भगवान श्री राम के आदर्शों और उनके संदेश को समाज तक सही और सम्मानजनक तरीके से पहुंचाना है. यदि कोई परिस्थिति इस उद्देश्य को प्रभावित करती दिखाई दे, तो उस पर ध्यान देना हमारा कर्तव्य बनता है.”

‘आपके प्रति कमेटी का सम्मान और स्नेह पहले जैसा ही है’

रामलीला कमेटी ने ये भी कहा, ”इस पर कमेटी ने विचार विमर्श करने बाद यह निर्णय लिया है कि इस वर्ष मंदोदरी की भूमिका किसी अन्य कलाकार द्वारा करवाई जाए. यह निर्णय केवल मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है. आपके प्रति कमेटी का सम्मान और स्नेह पहले जैसा ही है और इसमें कोई कमी नहीं है. हम आपके उज्जवल भविष्य और निरंतर सफलता की हार्दिक शुभकामनाएं देते है.”

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बता दें कि पिछले सप्ताह की शुरुआत में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और उसके बाद बीजेपी के कुछ नेताओं ने भी रामलीला में मंदोदरी के रोल के लिए पूनम पांडे को लिए जाने पर आपत्ति जताई थी. इसे लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद गहरा गया था.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।