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सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की कोशिश कर रहे 2 आतंकवादियों को किया ढेर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में घुसपैठ की कोशिश नाकाम करते हुए भारतीय सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को ढेर कर दिया है. उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में आतंकियों ने LOC पार करके भारत में घुसने की कोशिश की. सूत्रों के अनुसार, घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों की टुकड़ी को चुनौती दी. सुरक्षाबलों ने आतंकियों को रोकने के लिए गोलीबारी की, जिसमें 2 आतंकवादी मारे गए, लेकिन उनके शव अभी तक बरामद नहीं हुए हैं.

8 दिन में दूसरी बार हुई आतंकियों से मुठभेड़

सूत्रों के मुताबिक, दोनों आतंकियों के शव LoC के पास पड़े हैं, जिन्हें कब्जे में लिया जाएगा, उसके बाद ही आतंकियों की शिनाख्त हो पाएगी. बता दें कि पिछले 8 दिन में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच दूसरी बार एनकाउंटर हुआ है. अब से पहले 20 सितंबर 2025 दिन शनिवार को उधमपुर में दूदू-बसंतगढ़ के जंगलों में आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें एक जवान शहीद हो गया था और SPO समेत 2 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

अगस्त और सितंबर में हुए कई एनकाउंटर

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में गत 8 सितंबर 2025 को कुलगाम में सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन गुड्‌डर चलाया था, जिसमें आतंकियों से हुई मुठभेड़ में 2 जवान शहीद हुए थे. शहीद होने वाले जवानों में एक कैथल निवासी लांसनायक नरेंद्र सिंधु और दूसरा उत्तर प्रदेश निवासी पैरा कमांडो प्रभात गौड़ शामिल था, वहीं मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के 2 आतंकी भी ढेर हुए थे. एक आतंकी शोपियां निवासी आमिर अहमद डार और दूसरा आतंकी विदेशी था, जिसका नाम रहमान भाई था। आमिर सितंबर 2023 से लश्कर का मेंबर था और पहलगाम हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल था.

अगस्त में चलाए गए थे 2 आतंकी ऑपरेशन

बता दें कि 26 अगस्त 2025 को गुरेज सेक्टर में आतंकियों से मुठभेड़ हुई थी और सुरक्षाबलों ने 2 आतंकवादी ढेर किए थे. एक आतंकी की शिनाख्त ‘ह्यूमन GPS’ नाम से मशहूर बागू खान के रूप में हुई थी. 1995 से अबतक वह 100 से ज्यादा घुसपैठ के मामलों में आरोपी था. वहीं एक से 12 अगस्त तक कुलगाम में ऑपरेशन अखल चलाया गया था, जिसमें इसमें लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का आतंकवादी पुलवामा निवासी हारिस डार मारा गया था.

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साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।