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सोनी सब के ‘गणेश कार्तिकेय’ में सामने आई भगवान गणेश के प्रिय मोदक के पीछे की मधुर कहानी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अक्टूबर 2025: सोनी सब का शो ‘गाथा शिव परिवार की – गणेश कार्तिकेय’ अपनी दिव्य कहानियों के माध्यम से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना रहा है। यह शो भगवान शिव (मोहित मलिक), माता पार्वती (श्रेनु पारिख) और उनके पुत्र भगवान गणेश (एकांश कठरोटिया) व भगवान कार्तिकेय (सुभान खान) की अद्भुत यात्रा को दर्शाता है।

इस बार की भावनात्मक पौराणिक कथा भगवान गणेश के प्रिय मोदक के पीछे छिपे मीठे रहस्य को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत होती है माता पार्वती से, जो अपने मिठाई-प्रेमी पुत्र को संयम का पाठ सिखाने के लिए जानबूझकर उनके मनपसंद लड्डुओं में चीनी डालना भूल जाती हैं। भगवान गणेश पहले तो निराश होते हैं, लेकिन वे आदरपूर्वक मिठाई छोड़ देते हैं। यह देखकर उनके भाई भगवान कार्तिकेय भावुक हो जाते हैं और मार्गदर्शन के लिए भगवान शिव से सलाह लेते हैं। भगवान शिव की प्रेरणा से वे ऋषि अत्रि की पत्नी, करुणामयी अनुसूइया माता के पास जाते हैं। अनुसूइया माता एक भव्य भोज के दौरान एक नई मिठाई बनाती हैं — मोदक, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पौष्टिकता, सोच और संतुलन का प्रतीक बनता है। जब भगवान गणेश इस अनोखी मिठाई का स्वाद चखते हैं, तो उनका सारा दुख दूर हो जाता है। उसी क्षण से मोदक उनके हृदय के सबसे प्रिय बन जाते हैं — प्रेम, देखभाल और सजगता का अनंत प्रतीक।

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भगवान गणेश की भूमिका निभा रहे एकांश कठरोटिया ने इस प्यारी कहानी के बारे में कहा, “मुझे इस कहानी की शूटिंग बहुत पसंद आई क्योंकि इसमें गणेश जी के परिवार का प्यार झलकता है। पार्वती मां उन्हें डांटने के लिए नहीं, बल्कि उनकी देखभाल के लिए मिठाई बनाना बंद करती हैं। जब अनुसूइया मां मोदक बनाती हैं, तो वह गणेश के लिए विशेष रूप से प्रेम से बनाया गया पकवान होता है। यही वजह है कि मोदक उनका प्रिय प्रसाद बनता है — क्योंकि वह सिर्फ स्वादिष्ट नहीं, बल्कि स्नेह और ममता से भरा होता है।”

देखिए ‘गाथा शिव परिवार की – गणेश कार्तिकेय’, सोमवार से शनिवार, रात 8 बजे, केवल सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।