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सीबीआई ने सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. सीबीआई ने एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में क्‍लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है. इस रिपोर्ट में रिया चक्रवर्ती को क्‍लीन चिट दे दी गई है. वहीं सुशांत के परिवार ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है. परिवार ने रिपोर्ट को पूरी तरह से आंखों में धूल झोंकने वाली करार दिया है.आपको बता दें कि 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत ने आत्‍महत्‍या कर ली थी. आपको  सीबीआई की क्‍लोजर रिपोर्ट में सामने आईं 5 चौंकाने वाली बातों को बताते हैं.

बताया परिवार का हिस्‍सा

सीबीआई की क्‍लोजर रिपोर्ट के अनुसार सुशांत ने  अपने फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी को बताया था कि रिया चक्रवर्ती, परिवार का हिस्‍सा हैं. सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार सुशांत की बहन मीतू सिंह 8 से 12 जून तक उनके साथ ही रह रही थीं. उनकी मैनेजर श्रुति मोदी भी पैर में चोट के चलते फरवरी 2020 से ही उनसे मिलने नहीं जा पाई थीं.

पहले ही चली गईं

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिया, सुशांत की मौत से छह दिन पहले उनके बांद्रा अपार्टमेंट से चली गई थीं. ऐसे में किसी भी तरह की हेराफेरी या फिर उन्‍हें आत्‍महत्‍या के लिए उकसाने में वह शामिल नहीं थीं. उनके भाई शोविक चक्रवर्ती ने भी 8 जून को सुशांत सिंह राजपूत का फ्लैट छोड़ दिया था और फिर वह उनसे मिलने नहीं गए.

सुशांत के सामान का सच

रिया चक्रवर्ती पर सुशांत सिंह राजपूत का सामान ले जाने के आरोपों पर, सीबीआई ने कहा कि वह सिर्फ अपना एप्‍पल लैपटॉप और रिस्टवॉच ले गई थीं, जो दोनों ही एक्टर ने गिफ्ट में दिए थे. रिपोर्ट में कहा गया, ‘कोई सबूत नहीं दिखाता कि कोई प्रॉपर्टी बेईमानी से या सुशांत की जानकारी के बिना ली गई हो.’

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।