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दो साल गृह युद्ध का सामना कर रहे सूडान में युद्धविराम पर सहमत हुए आरएसएफ और एसएएफ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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खार्तूम. सूडान में दो साल से जारी खूनी संघर्ष के बीच अब शांति की किरण नजर आ रही है। देश की अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) ने कहा है कि वह अमेरिका के प्रस्ताव पर सूडानी सेना (एसएएफ) के साथ युद्धविराम के लिए तैयार है। एक समाचार एजेंसी के अनुसार, आरएसएफ ने गुरुवार को कहा कि वह अमेरिका, सऊदी अरब, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात की अगुवाई वाले ‘क्वाड’ समूह की तरफ से सुझाए गए मानवीय युद्धविराम को स्वीकार करने को तैयार है। इस युद्धविराम का उद्देश्य युद्ध से बिगड़ते मानवीय हालात को संभालना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस घोषणा पर सूडान की नियमित सेना की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

समझौते के बिंदुओं पर काम जारी

अमेरिका के अरब और अफ्रीकी मामलों के वरिष्ठ सलाहकार मसाद बुलोस ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिशें चल रही हैं और उन्होंने सिद्धांत रूप में सहमति दे दी है। बुलोस के मुताबिक, ‘किसी भी पक्ष ने शुरुआत में आपत्ति नहीं जताई है। अब हम समझौते के अहम बिंदुओं पर काम कर रहे हैं।’

सेना प्रमुख का तीखा बयान

इसी बीच, सेना प्रमुख अब्देल फतह अल-बुरहान ने गुरुवार को अपने संबोधन में कहा कि उनकी सेना दुश्मन की हार के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा, ‘जल्द ही हम उन लोगों का बदला लेंगे जिन्हें मार दिया गया या जिन पर अत्याचार हुआ… उन सभी इलाकों में जहां विद्रोहियों ने हमला किया।’

आरएसएफ पर अल-फाशर में जनसंहार के आरोप

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब आरएसएफ पर उत्तरी दारफुर राज्य की राजधानी अल-फाशर पर कब्जे के दौरान जनसंहार के आरोप लगे हैं। 26 अक्तूबर को शहर पर नियंत्रण पाने से पहले आरएसएफ ने करीब 18 महीने तक घेराबंदी की थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, आरएसएफ के कब्जे के बाद से 70000 से अधिक लोग अल-फाशर और उसके आसपास के इलाकों से पलायन कर चुके हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और मानवाधिकार संगठनों ने बताया है कि शहर में सामूहिक हत्याएं, दुष्कर्म और अत्याचार हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी बताया था कि आरएसएफ के कब्जे के दौरान एक बच्चों के अस्पताल में 460 से अधिक मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हुई।

RSF-SAF पर युद्ध अपराधों के आरोप

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने सितंबर में जारी अपनी रिपोर्ट में आरएसएफ और एसएएफ दोनों को युद्ध अपराधों का जिम्मेदार ठहराया था। इसमें कहा गया कि दोनों पक्षों ने नागरिकों पर हमले, हत्याएं और यौन हिंसा जैसे गंभीर अपराध किए हैं। वर्तमान में आरएसएफ का नियंत्रण सूडान के पश्चिमी दारफुर और दक्षिणी हिस्सों पर है, जबकि सेना उत्तर, पूर्व और नील नदी व लाल सागर के आसपास के इलाकों में मजबूत है।
साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।