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चोट के कारण मोहम्मद शमी का भारतीय क्रिकेट टीम में नहीं हुआ था चयन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. मोहम्मद शमी चैंपियंस ट्रॉफी के बाद से टीम इंडिया में वापस नहीं आए हैं. एक तरफ शमी का कहना है कि वो पूरी तरह फिट हैं, दूसरी ओर चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर का कहना था कि पूरी तरह फिट ना होने के कारण शमी का चयन नहीं हुआ था. शमी को इंग्लैंड टूर के बाद, वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज में भी नहीं चुना गया था. अब दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज के लिए भी उनका चयन नहीं हुआ है. शमी के सेलेक्शन को लेकर चल रहे विवाद के बीच बीसीसीआई के एक प्रवक्ता ने बड़ा बयान दिया है.

बीसीसीआई के एक प्रवक्ता ने बताया, “ऐसा कई बार हुआ है जब चयनकर्ताओं और बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के सपोर्ट स्टाफ ने कई बार मोहम्मद शमी की फिटनेस का हाल जाना है. चयन समिति उन्हें इंग्लैंड ले जाना चाहती थी, क्योंकि जसप्रीत बुमराह तीन से ज्यादा टेस्ट नहीं खेलने वाले थे. इंग्लैंड की कंडीशन में भला शमी जैसी क्षमता वाला गेंदबाज कौन नहीं चाहेगा?”

भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका टेस्ट सीरीज 14 नवंबर से शुरू हो रही है. इस सीरीज के लिए भी मोहम्मद शमी का टीम इंडिया स्क्वाड में चयन नहीं हुआ है. इस पर सूत्र ने बताया, “एक ऐसा नैरेटिव सेट कर दिया गया कि शमी से कोई संपर्क नहीं साधा गया, यह बिल्कुल सच नहीं है. स्पोर्ट्स साइंस टीम के पास उनकी मेडिकल रिपोर्ट है, जो बताती है कि शमी इंटरनेशनल मैचों का भार झेल सकते हैं या नहीं.”

रणजी ट्रॉफी में की दमदार वापसी

इस बीच मोहम्मद शमी ने डोमेस्टिक रेड बॉल टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में वापसी की है. बंगाल के लिए अभी तक दोनों मैचों में उन्होंने मैच विजेता प्रदर्शन करके दिखाया है. रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन के सिर्फ 2 मैचों में शमी 15 विकेट चटका चुके हैं.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।