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बीसीसीआई की सख्ती के बाद रोहित शर्मा ने घरेलू क्रिकेट खेलने पर जताई सहमति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज में विराट कोहली और रोहित शर्मा ने आखिरी मैच में बेहतरीन पारी खेली थी. रोहित ने आखिरी मैच में शतक बनाकर भारत को जीत दिलाई थी तो वहीं, कोहली ने अर्धशतकीय पारी खेली थी. दोनों ने अपनी पारी से फैन्स का दिल जीता था लेकिन ऐसा लगता है कि बीसीसीआई दोनों की पारी से ज्यादा खुश नहीं है. अब बीसीसीआई ने दोनों खिलाड़ियों के  फ्यूचर को लेकर बड़ा बयान दिया है.

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कथित तौर पर इन अनुभवी खिलाड़ियों के लिए घरेलू क्रिकेट में खेलना अनिवार्य कर दिया है, अगर उन्हें राष्ट्रीय टीम में चयन के लिए विचार किया जाना है.  टेस्ट और टी20 इंटरनेशनल से संन्यास लेने के बाद, रोहित और कोहली केवल 50 ओवर के प्रारूप में ही सक्रिय क्रिकेटर बने हुए हैं. इसलिए, चयन के लिए उनकी मैच फिटनेस एक बड़ा बहस का विषय बन गई है. साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम के चयन से पहले, विजय हजारे ट्रॉफी में इन दोनों खिलाड़ियों की संभावित भागीदारी का मुद्दा तेज हो गया है.

रोहित ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए) को पहले ही सूचित कर दिया है कि वह विजय हज़ारे ट्रॉफी में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे. दूसरी ओर, कोहली ने अभी तक घरेलू वनडे सीरीज के लिए अपनी उपलब्धता की स्थिति स्पष्ट नहीं की है.” बीसीसीआई के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “बोर्ड और टीम प्रबंधन ने दोनों को बता दिया है कि अगर उन्हें भारत के लिए खेलना है तो उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलना होगा. दरअसल, वे दोनों दो प्रारूपों से संन्यास ले चुके हैं, इसलिए मैच फिट होने के लिए उन्हें घरेलू क्रिकेट खेलना होगा.

रोहित शर्मा खेलेंगे सैयद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट

दूसरी ओर खबर है कि रोहित शर्मा बीसीसीआई के इस मैसेज को हासिल कर इसे स्वीकार भी कर लिया है. रिपोर्ट के अनुसार रोहित   26 नवंबर से शुरू होने वाले सैयद मुश्ताक अली टी20 टूर्नामेंट के लिए भी उपलब्ध हो सकते हैं. रोहित और कोहली ने पिछले सीजन में एक-एक रणजी ट्रॉफी मैच खेला था.  अब ये देखना है कि विराट कोहली, कब घरेलू क्रिकेट में अपनी भागीदारी तेज करते हैं.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।