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सुरक्षा चिंताओं के कारण श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के 8 खिलाड़ियों ने पाकिस्तान छोड़ा, दूसरा वनडे रद्द

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इस्लामाबाद. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बम फटने से पूरे देश में दहशत का माहौल है। इससे श्रीलंकाई टीम भी बुरी तरह से डर गई है। यही वजह है कि पाकिस्तान दौरे पर गई श्रीलंका क्रिकेट टीम के आठ खिलाड़ी सुरक्षा चिंताओं के चलते गुरुवार यानी 12 नवंबर को स्वदेश लौटने का फैसला किया है। यह कदम उस भीषण इस्लामाबाद बम धमाके के बाद उठाया गया है, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। श्रीलंका क्रिकेट (SLC) के सूत्रों ने इस जानकारी की पुष्टि की। इस घटनाक्रम के चलते गुरुवार को रावलपिंडी में होने वाले दूसरे ODI मुकाबले पर रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है। बता दें कि पाकिस्तान ने 11 नवंबर को खेले गए पहले ODI में श्रीलंका को 6 रन से हराया था।

त्रिकोणीय सीरीज पर भी मंडराया खतरा

तीन मैचों की ODI सीरीज के बाद श्रीलंका की टीम को पाकिस्तान और जिम्बाब्वे के साथ त्रिकोणीय सीरीज भी खेलनी थी। हालांकि अब SLC ने कहा है कि स्वदेश लौटने वाले खिलाड़ियों की जगह नए खिलाड़ियों को भेजा जाएगा ताकि टीम आगे के मैचों में भाग ले सके। सूत्रों के अनुसार, खिलाड़ियों ने रावलपिंडी और इस्लामाबाद की नजदीकी को देखते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की।

2009 के हमले की याद हुई ताजा

यह घटना पाकिस्तान में एक दुखद इतिहास की याद दिलाती है। साल 2009 में लाहौर में गद्दाफी स्टेडियम के बाहर श्रीलंकाई टीम की बस पर आतंकवादियों ने हमला किया था। उस हमले में कप्तान महेला जयवर्धने, अजंथा मेंडिस और चमिंडा वास जैसे कई खिलाड़ी घायल हुए थे, जबकि कई पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। उस हमले के बाद लगभग 10 सालों तक कोई भी विदेशी टीम पाकिस्तान दौरे पर नहीं आई और पाकिस्तान को अपने घरेलू मुकाबले UAE जैसे न्यूट्रल वेन्यू पर आयोजित करने पड़े। दिलचस्प बात यह है कि 2019 में श्रीलंका का ही पाकिस्तान दौरा वह ऐतिहासिक पल था जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की पाकिस्तान में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया था।

श्रीलंका के पाकिस्तान दौरे का 11 नवंबर को आगाज हुआ था। दूसरा मैच 13 नवंबर को खेला जाना था लेकिन अब अपडेट आया है कि सुरक्षा कारणों की वजह से दूसरा ODI रद्द हो गया है। इससे पाकिस्तान को एक बार फिर शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।