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कर्नाटक सरकार ने कुत्तों के काटने से मरने वाले लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बेंगलुरु. देशभर में आवारा कुत्तों द्वारा लोगों और छोटे बच्चों को काटने की बढ़ती घटनाओं के बीच कर्नाटक सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने कहा है कि अगर कुत्ते के काटने से किसी की मौत होती है तो राज्य सरकार परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देगी। कर्नाटक सरकार ने कुत्ते के काटने और जख्मी होने पर मदद राशि का ऐलान किया है। गौरतलब हो कि आवारा कुत्तों के काटने के सीसीटीवी वीडियो अक्सर सामने आते हैं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

सरकार ने जारी किया आदेश

18 नंबर को जारी एक आदेश में कर्नाटक सरकार ने कुत्तों के काटने से मरने वालों के परिजनों को 5 लाख रुपये का मुआवज़ा देने की घोषणा की है। आवारा कुत्तों द्वारा त्वचा पर किए गए घाव, गहरे काले रंग के घाव, आवारा कुत्तों द्वारा कई बार काटने पर कुल 5000 रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा। आदेश मेंकहा गया है कि पीड़ित को 3500 रुपये और सुवर्णा आरोग्य सुरक्षा ट्रस्ट को इलाज के खर्च के लिए 1500 रुपये दिए जाएंगे। गौरतलब हो कि कुत्तों द्वारा बुजुर्ग और बच्चों को निशाना बनाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।

लगातार बढ़ रहे हैं केस
भारत में कुत्ते के काटने की घटनाओं की संख्या काफी अधिक है। 2024 में देश भर में 37 लाख से अधिक कुत्ते के काटने के मामले दर्ज किए गए। 2024 में कुल 37.17 लाख मामले दर्ज हुए जो प्रतिदिन औसतन 10,000 से अधिक मामले हैं। 2023 में, यह संख्या 30.5 लाख थी। इतना ही नहीं 2022 में, लगभग 21.9 लाख मामले सामने आए थे। इन मामलों में से अधिकांश आवारा कुत्तों के काटने के हैं।

साभार : नवभारत टाइम्स

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।