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अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ में सेना ने तख्तापलट कर सत्ता पर किया कब्जा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बिस्सौ. अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के सैनिकों ने बुधवार को सरकारी टेलीविजन पर कहा कि उन्होंने देश की सत्ता पर कब्जा कर लिया है. देश के राष्ट्रपति भवन के निकट गोलीबारी की खबरों के बाद सैनिकों ने यह जानकारी दी. सैन्य उच्च कमान ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान में कहा कि उसने “गिनी-बिसाऊ गणराज्य के राज्य की पूर्ण शक्तियां अपने हाथ में ले ली हैं.’ देश की सैन्य उच्च कमान के प्रवक्ता डिनिस एन’तचमा ने कहा कि यह कदम ‘हमारे देश को अस्थिर करने के लिए चल रही एक योजना के जवाब में उठाया गया है.’

राष्‍ट्रपति बोले, मुझे हटा दिया गया

सेना के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने राष्‍ट्रपति उमारो सिसोको एंबालो को हटा दिया है, चुनाव प्रक्रिया रोक दी है, बॉर्डर सीज कर दिए हैं और कर्फ्यू लगा दिया है. इस बयान के तुरंत बाद, एम्बालो ने फ्रांस 24 टीवी को बताया: ‘मुझे हटा दिया गया है.’  सेना के अधिकारियों ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने ‘द हाई मिलिट्री कमांड फॉर द रेस्टोरेशन ऑफ ऑर्डर’ बनाया है और अगली सूचना तक वे पश्चिम अफ्रीकी देश के इंचार्ज रहेंगे.

राष्‍ट्रपति सेना के ऑफिस में 

अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि उन्होंने एम्बालो को हिरासत में लिया है या नहीं. दो सुरक्षा सूत्रों के हवाले से न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स ने जानकारी दी कि उन्हें आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ के ऑफिस में रखा गया है. बुधवार देर रात अपने कैंपेन द्वारा बांटे गए एक वीडियो बयान में, चुनाव में एम्बालो के टॉप चैलेंजर फर्नांडो डायस ने कहा कि हथियारबंद लोगों द्वारा उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश के बाद वह आजाद और सुरक्षित जगह पर हैं.

राजनेता बोले, झूठा है तख्‍तापलट 

डायस ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डोमिंगोस सिमोस परेरा, जिन्हें एम्बालो ने 2019 के चुनाव में हराया था, को हिरासत में ले लिया गया है. उन्होंने कहा, ‘हम एक झूठे तख्तापलट की कोशिश का निशाना बने हैं, सिर्फ इसलिए कि मैं चुनाव जीता था… यह एक दिखावा है.’ अफ्रीकन यूनियन और वेस्ट अफ्रीकी रीजनल ब्लॉक ECOWAS ने बुधवार रात एक जॉइंट स्टेटमेंट में तख्तापलट की घोषणा पर ‘गहरी चिंता’ जताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के इंचार्ज अधिकारियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है और उनकी तुरंत रिहाई की मांग की.

यह गिनी-बिसाऊ में अशांति का सबसे नया मामला था, जो सेनेगल और गिनी के बीच बसा एक छोटा सा तटीय देश है और यूरोप जाने वाले कोकीन का एक बदनाम अड्डा है. यह तुरंत साफ नहीं था कि सेना को गिनी-बिसाऊ की सभी उग्र सेना का सपोर्ट था या वो करीब 2 मिलियन लोगों वाले पूरे देश पर कंट्रोल कर रहे थे.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।