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पाकिस्तान ने श्रीलंका में बाढ़ पीड़ितों के लिए सड़ा-गला और एक्सपायरी डेट वाला खाना भेजा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलंबो. दुश्मन मिलें हजार… लेकिन दोस्त न मिले कंगाल. ऐसा ही आज श्रीलंका सरकार और वहां बाढ़ पीड़ित लोग पाकिस्तान के लिए बोल रही होगी. भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में दितवाह तूफान की वजह से भारी नुकसान हुआ है. ऐसे में भारत समेत कई देश वहां राहत सामग्री भेज रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान ने तो हद ही कर दी. शहबाज शरीफ ने मदद के नाम पर श्रीलंका में जो राहत सामग्री भेजी, वो एक्सपायर निकली. हैरानी की बात ये है कि पाकिस्तान ऐसी दगाबाजी तुर्की के साथ भी कर चुका है.

दरअसल, श्रीलंका में भारत का राहत बचाव कार्य जारी है. ऐसे में बड़के मारने के लिए पाकिस्तान ने फौरन श्रीलंका को फूड आइट्म भेज दिए और ढींग मारने के लिए फोटो भी श्रीलंका में स्थित पाकिस्तानी दूतावास के एक्स हैंडल से शेयर कर दीं. लेकिन उसका फर्जीवाड़ा ज्यादा देर नहीं चला. जब लोगों ने फूड आइटम की फोटो को जूम करके देखा तो उसमें एक्सपायरी डेट 2024 की दिखी. मतलब मदद के नाम पर पाकिस्तान पहले से ही परेशान श्रीलंकावासियों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर रहा था. मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मच गया.

तुर्की के साथ भी कर चुका है ऐसा धोखा

आपको याद हो साल 2023 में तुर्की में आए भूकंप के बाद भारत ने बड़े पैमाने पर राहत-बचाव कार्य चलाया था. टनों टन राहत सामग्री भेजी थी. ऐसे में हमारा कंगाल पड़ोसी पीछे कैसे रहता. भारत की जब दुनिया में वाहवाही होने लगी तो शहबाज शरीफ खुद राहत सामग्री लेकर तुर्की पहुंच गए. लेकिन जब ध्यान से देखा तो पता चला ये वही राहत-सामग्री है जो तुर्की ने पाकिस्तान को बाढ़ के दौरान भेजी थी. मतलब पाकिस्तान ने तुर्की का माल उसी को ही चिपका दिया, वो भी बेशर्मी से.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।