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यमन में दो मुस्लिम देशों सऊदी अरब और यूएई के बीच छिड़ गया भयंकर युद्ध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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सना. यमन को लेकर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच तनाव बढ़ रहा है। यमन के तेल से भरपूर हद्रामौत इलाके में यूएई के समर्थन वाली मिलिशिया सेना अहम इलाकों पर कब्जा कर रही है, जहां पहले सऊदी सपोर्ट वाली यमन की भगोड़ी सरकार का नियंत्रण था। गुरुवार को हिंसक झड़पें हुईं, जब यूएई समर्थित मिलिशिया अल-घुराफ इलाके की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही थीं। ईरानी मीडिया ने इस बारे में जानकारी दी है। स्थानीय लोगों द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में यूएई समर्थित मिलिशिया सेयुन में प्रेसिडेंशियल पैलेस पर धावा बोलते हुए दिख रही हैं।

इसके पहले 3 दिसम्बर को UAE समर्थित सेना ने दूसरे सबसे बड़े शहर सेयुन पर कब्जा की घोषणा की थी। इसके बाद से यमन के सबसे बड़े प्रांत हद्रामौत में यूएई और सऊदी समर्थित सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया है। हद्रामौत में बुधवार सुबह से बड़े पैमाने पर हमले हुए हैं, जिसमें तोपों का भी इस्तेमाल हुआ है।

सऊदी अरब और UAE में तनाव

यमन में उत्तर-पश्चिम हिस्से पर हूती विद्रोहियों का कब्जा है, जबकि दूसरे इलाकों पर सऊदी समर्थित सरकार का नियंत्रण है। UAE के समर्थन वाले प्रशासन ने पहले यमन से दक्षिणी इलाके को अलग करने की मांग की थी, ताकि अदन समेत दक्षिण के कुछ हिस्सों पर कंट्रोल किया जा सके। यह यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच चल रहे तनाव को साफ दिखाता है।

हद्रामौत पर कब्जे की जंग

हद्रामौत यमन का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के एक तिहाई से ज्यादा हिस्से में फैला है। तेल और खनिज से मालामाल होने के सात ही इसके साथ 450 किलोमीटर लंबी तटरेखा भी है। यूएई इसके पहले यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन में पार्टनर रहा है। इसके बावजूद रियाद और अबू धाबी यमन के संसाधनों और रणनीतिक पोर्ट पर कंट्रोल के लिए मुकाबला कर रहे हैं। हद्रामौत इस दुश्मनी का केंद्र बन गया है। आलोचक दोनों देशों पर अपने फायदे के लिए यमन को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाते हैं।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।