भोपाल. मध्य प्रदेश के ग्वालियर में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का अपमान करने और उनकी तस्वीर जलाने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। इस घटना के बाद शहर में बढ़ते आक्रोश और तनाव को देखते हुए प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
मुख्य घटनाक्रम और FIR
1 जनवरी को ग्वालियर में ‘रक्षक मोर्चा’ द्वारा किए गए एक प्रदर्शन के दौरान डॉ. अंबेडकर की तस्वीर जलाने और उनके खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना के विरोध में दलित संगठनों ने एसपी ऑफिस के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन किया।
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FIR दर्ज: साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ने एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित 7 से 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है।
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धाराएं: आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई
पुलिस ने गुरुवार रात को छापेमारी कर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित चार मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया।
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गिरफ्तार आरोपी: अनिल मिश्रा, मोहित ऋषिश्वर, अमित दुबे और गौरव व्यास।
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कोर्ट का फैसला: शुक्रवार दोपहर सभी गिरफ्तार आरोपियों को जिला न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने का आदेश दिया है।
शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
कोर्ट परिसर और शहर के संवेदनशील इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। भीम आर्मी और अन्य संगठनों द्वारा ‘रासुका’ (NSA) लगाने की मांग और प्रदर्शनों की चेतावनी को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है।
तनाव की पृष्ठभूमि
यह विवाद नया नहीं है। पिछले कई महीनों से ग्वालियर हाई कोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा लगाने को लेकर दो गुटों के बीच विवाद चल रहा है। वकील अनिल मिश्रा इस प्रतिमा स्थापना के विरोध का नेतृत्व कर रहे थे। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी इस मुद्दे पर शहर में धारा 163 (पूर्व में 144) लागू करनी पड़ी थी।
प्रशासन की अपील
ग्वालियर पुलिस ने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर साइबर सेल की कड़ी नजर है और वैमनस्यता फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
ग्वालियर में बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर जलाने के मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज FIR में मुख्य रूप से निम्नलिखित धाराओं का समावेश है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रमुख धाराएं
1 जुलाई 2024 से लागू हुए नए कानूनों के तहत इस मामले में ये धाराएं लगाई गई हैं:
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धारा 196 (1) (a, b, c): यह धारा विभिन्न समूहों (जाति, धर्म, भाषा आदि) के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने और सद्भाव बिगाड़ने वाले कार्यों के लिए लगाई जाती है। (पूर्व में IPC 153A)।
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धारा 223 B: यह धारा लोक सेवक द्वारा जारी किसी आदेश की अवज्ञा करने या शांति भंग करने के इरादे से की गई गतिविधियों से संबंधित है।
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धारा 353 (1) (C): सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से भड़काऊ बयान देना या रिपोर्ट प्रकाशित करना। (पूर्व में IPC 505)।
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धारा 299: किसी भी वर्ग की धार्मिक या पवित्र भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से किया गया अपमान। (पूर्व में IPC 295A)।
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धारा 190: गैर-कानूनी सभा (Unlawful Assembly) का हिस्सा होना या सार्वजनिक शांति को खतरे में डालना।
SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम
चूंकि यह अपमानजनक कृत्य दलित समुदाय के आदर्श और संविधान निर्माता के विरुद्ध था, इसलिए पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं को भी FIR में जोड़ा है। यह धाराएं मामले को गैर-जमानती और अधिक गंभीर बनाती हैं।
मामले की वर्तमान स्थिति
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मुख्य आरोपी: एडवोकेट अनिल मिश्रा को मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर नामजद किया गया है।
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गिरफ्तारी: पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान कर अनिल मिश्रा समेत कुछ अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया है।
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जांच: पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो साझा कर तनाव फैलाने वाले अन्य प्रोफाइल्स की भी जांच कर रही है।
नोट: ग्वालियर जिला प्रशासन ने शहर में शांति बनाए रखने के लिए धारा 163 (BNSS) लागू कर दी है, जिसके तहत बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के जुलूस, रैली या प्रदर्शन पर प्रतिबंध है।
Matribhumisamachar


