लोड हो रहा है...

जोशीमठ आर्मी कैंप में भीषण अग्निकांड: सेना के स्टोर में लगी आग से मचा हड़कंप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

देहरादून. उत्तराखंड के सीमांत जिले चमोली के जोशीमठ में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सेना के इंजीनियरिंग कोर परिसर स्थित एक टिन शेड स्टोर में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि इसकी ऊंची लपटें और काला धुआं कई किलोमीटर दूर से ही आसमान में दिखाई दीं। आग पर काबू पा लिया गया है।

घटना का समय और स्थान

  • समय: आग शुक्रवार दोपहर लगभग 1:30 से 2:00 बजे के बीच लगी।

  • स्थान: यह आग जोशीमठ के औली रोड पर स्थित भारतीय सेना के कैंप के एक स्टोर रूम/टिन शेड भवन में लगी।

आग फैलने का कारण

  • प्राथमिक कारण: शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, आग लगने की वजह एक छोटी चिंगारी या शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

  • हवा का प्रभाव: ऊँचाई वाले क्षेत्र में चल रही तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया, जिससे लपटें तेजी से फैलीं और काले धुएं का गुबार आसमान में छा गया।

राहत और बचाव कार्य

  • त्वरित कार्रवाई: सेना के लगभग 100 से अधिक जवान तुरंत राहत कार्य में जुट गए।

  • फायर ब्रिगेड: सेना की अपनी फायर यूनिट के साथ-साथ स्थानीय फायर ब्रिगेड और ITBP के जवानों ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाला।

  • नियंत्रण: करीब 2 से 2.5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।

जान-माल का नुकसान

  • जनहानि: राहत की बात यह है कि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। सभी सैनिक और कर्मचारी सुरक्षित हैं।

  • सम्पत्ति का नुकसान: आग में स्टोर के अंदर रखा काफी सामान, जिसमें प्लास्टिक, लोहा और अन्य उपकरण शामिल थे, जलकर राख हो गया है। लाखों की संपत्ति के नुकसान का अनुमान है।

वर्तमान स्थिति

  • जोशीमठ के उपजिलाधिकारी (SDM) चंद्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।

  • सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।