लखनऊ. लोक गायिका नेहा सिंह राठौर शनिवार (3 जनवरी 2026) की रात अपने पति हिमांशु सिंह के साथ लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली पहुंचीं। उन्हें पुलिस द्वारा जारी किए गए दूसरे नोटिस के बाद बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। नेहा पर आरोप है कि उन्होंने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ अपमानजनक और ‘राष्ट्रविरोधी’ टिप्पणी की थी।
पुलिस की कार्रवाई और पूछताछ
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बयान दर्ज: नेहा सिंह राठौर लगभग 3 से 4 घंटे तक थाने में मौजूद रहीं। हालांकि, रात के समय महिला का औपचारिक बयान दर्ज करने में कुछ तकनीकी और कानूनी पेच फंसे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें पूछताछ के बाद जाने दिया।
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हिरासत की खबरें: सोशल मीडिया पर उनके हिरासत में लिए जाने की अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन उनके पति हिमांशु और एसीपी हजरतगंज ने स्पष्ट किया कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है। वह स्वेच्छा से जांच में सहयोग करने पहुंची थीं।
क्या है पूरा विवाद? (मामले की पृष्ठभूमि)
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FIR का आधार: 27 अप्रैल 2025 को कवि अभय प्रताप सिंह की शिकायत पर नेहा के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
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आरोप: उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और IT एक्ट के तहत मामला दर्ज है। आरोप है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता था और उनके बयानों का इस्तेमाल पाकिस्तानी मीडिया द्वारा भारत विरोधी प्रचार के लिए किया गया।
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कोर्ट का रुख: इससे पहले, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।
नेहा सिंह राठौर और उनके पति का पक्ष
नेहा के पति हिमांशु ने बताया कि पहला नोटिस करीब 15 दिन पहले मिला था, लेकिन नेहा के अस्वस्थ होने के कारण वे नहीं आ सके थे। दूसरा नोटिस मिलने पर वे तुरंत पुलिस के सामने पेश हुए। नेहा ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“मैं कानून का सम्मान करती हूँ और जांच में पूरा सहयोग दे रही हूँ। मुझे जब बुलाया जाएगा, मैं अपना पक्ष रखने के लिए दोबारा आऊंगी।”
दर्ज की गई मुख्य धाराएं (भारतीय न्याय संहिता – BNS)
चूंकि यह मामला जुलाई 2024 के बाद का है, इसलिए इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है:
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धारा 196 (BNS): विभिन्न समूहों के बीच धर्म, जाति या भाषा के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देना। (पुरानी IPC धारा 153A के समकक्ष)।
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धारा 353 (BNS): सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से झूठी खबर या बयान फैलाना। (पुरानी IPC धारा 505 के समकक्ष)।
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IT एक्ट की धारा 66D: कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके किसी के साथ छल करना या भ्रामक जानकारी फैलाना।
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आरोप का आधार: पुलिस का तर्क है कि उनके पोस्ट ने न केवल सरकार की आलोचना की, बल्कि सुरक्षा बलों के मनोबल को प्रभावित किया और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का पिछले दिनों का आदेश
नेहा सिंह राठौर ने इस मामले में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी दी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार थीं:
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा: माननीय न्यायालय ने कहा कि ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों या राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बिना तथ्यों के अपमानजनक टिप्पणी करे।
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जांच में सहयोग की शर्त: कोर्ट ने उन्हें तुरंत राहत देने से इनकार करते हुए निर्देश दिया कि उन्हें जांच अधिकारी (IO) के सामने पेश होना होगा और जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा।
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हस्तक्षेप से इनकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया (Prima Facie) अपराध बनता दिख रहा है, इसलिए FIR को रद्द नहीं किया जा सकता।
‘पाकिस्तानी मीडिया’ वाला एंगल
पुलिस की चार्जशीट और पूछताछ में एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि नेहा के ट्वीट/पोस्ट का स्क्रीनशॉट कुछ पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल्स द्वारा भारत की छवि बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसियां अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि क्या इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश थी या यह महज एक इत्तेफाक था।
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