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आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता ने रचा अहम् चिकित्सकीय मुकाम, स्तन कैंसर मरीज की सफल सर्जरी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता, जनवरी 2026 : आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता ने अपने आरजी इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड ब्रेस्ट केयर के माध्यम से दाहिने स्तन के कैंसर से पीड़ित 68 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया। वरिष्ठ ब्रेस्ट सर्जन डॉ. ताप्ती सेन के नेतृत्व में मरीज की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी के साथ बगल की लिम्फ नोड्स की सफाई (लेवल थ्री तक) की गई। यह सफल सर्जरी अस्पताल की ब्रेस्ट कैंसर के उन्नत इलाज में मजबूत विशेषज्ञता को दर्शाती है, जहाँ सटीक उपचार के साथ मरीज की जल्दी रिकवरी पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है।

प्रक्रिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता की ब्रेस्ट सर्जरी कंसल्टेंट डॉ. ताप्ती सेन ने कहा, “लिम्फ नोड्स से जुड़े स्तन कैंसर के मरीजों के लिए मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी आज भी एक अहम् उपचार विकल्प है। समय पर उचित जाँच, उपयुक्त सर्जरी और सर्जरी के बाद की व्यवस्थित देखभाल से बेहतर परिणाम मिलते हैं और साथ ही मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है।”

मरीज पिछले एक वर्ष से दाहिने स्तन में बिना दर्द की सूजन की शिकायत लेकर आई थीं, जिसका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा था। जाँच और इमेजिंग में स्तन के उनके निचले हिस्से में 3.3 x 3 सेमी की सख्त और अनियमित गाँठ पाई गई, जो त्वचा या अंदर की गहरी संरचनाओं तक नहीं फैली थी। मैमोग्राम और दाहिने स्तन से की गई ट्रू-कट बायोप्सी में कार्सिनोमा राइट ब्रेस्ट की पुष्टि हुई। पूरे शरीर की पीईटी-सीटी जाँच में बीमारी सिर्फ उसी क्षेत्र तक सीमित पाई गई और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलाव नहीं दिखा।

इसके बाद आईएचसी जाँच के बाद मरीज की दाहिने स्तन की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी और बगल के लिम्फ नोड्स की सफाई की सर्जरी की गई। सर्जरी से पहले सभी जरूरी जाँचें और एनेस्थीसिया की अनुमति ली गई। ऑपरेशन से पहले मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट की राय भी ली गई। मरीज और उनके परिजनों को इलाज की पूरी प्रक्रिया और सर्जरी के बाद होने वाली सावधानियों, जैसे कि लिम्फ सूजन या घाव में संक्रमण से बचाव के बारे में विस्तार से समझाया गया। सर्जरी के 48 घंटे बाद ड्रेन के साथ मरीज को छुट्टी दे दी गई। फिलहाल मरीज की हालत अच्छी है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी सहित पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की देखरेख से बेहतर और लंबे समय तक अच्छे परिणाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।