मुंबई. पिछले कई हफ्तों से दबाव में चल रहा भारतीय रुपया फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में मजबूती के साथ उभरा है। अमेरिका के साथ हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील, टैरिफ में कटौती और शेयर बाजार में आई तेज़ी ने रुपये को डॉलर के मुकाबले बड़ी राहत दी है। विदेशी निवेशकों की वापसी और RBI के हस्तक्षेप ने भी मुद्रा बाजार की दिशा बदल दी है।
💱 आज का रुपया भाव (4 फरवरी 2026)
बुधवार, 4 फरवरी 2026 को शुरुआती कारोबार में रुपया 90.42 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर नजर आया। (समाचार लिखे जाने तक की स्थिति)
- मंगलवार की क्लोजिंग: रुपया करीब 1.2% की मजबूती के साथ 90.32 पर बंद
- पिछले सप्ताह का रिकॉर्ड लो: 30 जनवरी 2026 को रुपया 92.02 के सर्वकालिक निचले स्तर तक फिसल गया था
करेंसी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह तेजी संकेत देती है कि बाजार में अब डर की जगह स्थिरता लौट रही है।
📌 रुपये में मजबूती के 3 सबसे बड़े कारण
1️⃣ अमेरिका ने घटाया टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को 25% से घटाकर 18% करने की घोषणा की।
👉 इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा और डॉलर इनफ्लो बढ़ने की संभावना है।
2️⃣ रूस–अमेरिका तेल समझौता
भारत ने रूस से कच्चा तेल आयात कम करने और अमेरिका से तेल खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है।
👉 इससे भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं, जिसका सकारात्मक असर फॉरेक्स मार्केट पर दिख रहा है।
3️⃣ RBI का सक्रिय हस्तक्षेप
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 92.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर को टूटने से बचाने के लिए डॉलर बिक्री के ज़रिए बाजार में दखल दिया।
👉 इससे रुपये में गिरावट रुकी और निवेशकों का भरोसा लौटा।
📊 शेयर बाजार में सुपर रैली, FIIs की वापसी
ट्रेड डील की खबर का असर शेयर बाजार पर भी साफ दिखा।
- सेंसेक्स में 2300 अंकों से ज्यादा की जोरदार तेजी
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली अब खरीदारी में बदलती दिख रही है
👉 FIIs की वापसी से डॉलर की मांग घटी और रुपये को मजबूती मिली।
👨👩👧👦 आम आदमी पर क्या होगा असर?
| क्षेत्र | असर |
|---|---|
| आयात (Import) | मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चा तेल सस्ता हो सकता है |
| विदेशी शिक्षा | विदेश में पढ़ाई करने वालों के लिए डॉलर खरीदना आसान |
| महंगाई | आयातित वस्तुएं सस्ती होने से महंगाई पर दबाव कम |
| निवेश | शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत |
🔮 आगे रुपये की चाल क्या होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि
- US-India ट्रेड डील ज़मीनी स्तर पर लागू होती है
- FIIs की खरीद जारी रहती है
- कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं
तो रुपया आने वाले दिनों में 89–90 के दायरे की ओर और मजबूत हो सकता है। हालांकि वैश्विक बाजार और अमेरिकी फेड की नीति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
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