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लालू यादव परिवार को लारा प्रोजेक्ट केस में राहत या झटका? 3 मार्च को आएगा कोर्ट का बड़ा फैसला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए अदालती गलियारों से एक राहत भरी खबर आई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को लारा (LARA) प्रोजेक्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत 3 मार्च को अपना फैसला सुना सकती है।

IRCTC घोटाले में CBI का कड़ा रुख

एक तरफ जहाँ मनी लॉन्ड्रिंग केस में आदेश सुरक्षित रखा गया है, वहीं दूसरी ओर IRCTC घोटाले में लालू परिवार की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट में CBI ने लालू परिवार की उस याचिका का कड़ा विरोध किया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने को चुनौती दी गई थी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जब कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया, तब उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी (Sanction for Prosecution) नहीं ली गई थी, जो कानूनन अनिवार्य है।

CBI की दलील: “मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी”

CBI की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) डी.पी. सिंह ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि:

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत इन आरोपियों पर मुकदमा चलाने के लिए शुरुआत में मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं था।

  • तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी 2020 में यही कानूनी राय दी थी।

  • हालांकि, प्रक्रिया में किसी भी तरह की कमी न रहे, इसलिए बाद में कानून के अनुसार जरूरी मंजूरी ले ली गई थी।

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि 13 अक्टूबर 2025 को विशेष अदालत ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने रेलवे के होटलों के रखरखाव का ठेका निजी कंपनियों को देने के बदले अनुचित लाभ प्राप्त किए थे।

अब सभी की निगाहें 3 मार्च पर टिकी हैं, जब कोर्ट लारा प्रोजेक्ट केस में अपनी अंतिम राय स्पष्ट करेगा।

यह भी पढ़ें: बिहार की राजनीति और लालू परिवार से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण खबरें – मातृभूमि समाचार

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।