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कानपुर के डॉ. डी.पी. राव को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (लंदन) के सदस्य नियुक्त

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर। शिक्षा और शोध के क्षेत्र में औद्योगिक नगरी कानपुर का नाम एक बार फिर वैश्विक पटल पर रोशन हुआ है। डीएवी कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग में कार्यरत प्रोफेसर डॉ. डी.पी. राव को दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्था रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (RSC), लंदन का सदस्य नियुक्त किया गया है।

कॉलेज के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

डीएवी कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर दीक्षित ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि डॉ. राव कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग के पहले ऐसे प्राध्यापक हैं, जिन्हें इस अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी की सदस्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने इसे डॉ. राव के उत्कृष्ट शोध कार्य की विशेष पहचान बताया, जिससे न केवल कॉलेज बल्कि पूरे शहर का मान बढ़ा है।

शोध और नवाचार में बेमिसाल करियर

डॉ. राव का शैक्षणिक करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उनके शोध और योगदान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • प्रकाशन: उनके 80 से अधिक शोध पत्र एल्सेविएर, स्प्रिंगर और टेलर एंड फ्रांसिस जैसे विश्व प्रसिद्ध प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित किए जा चुके हैं।

  • पेटेंट: नवाचार के क्षेत्र में उन्होंने 10 से अधिक पेटेंट अपने नाम किए हैं।

  • विशेषज्ञता: उनका शोध मुख्य रूप से ट्रांजीशन मेटल केमिस्ट्री (Transition Metal Chemistry) पर केंद्रित है।

  • प्रशासनिक जिम्मेदारी: वर्तमान में वे कॉलेज में आई.क्यू.ए.सी. (IQAC), समर्थ और यू.पी. प्रमाण के समन्वयक (Coordinator) के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

क्या है रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री?

लंदन स्थित रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (RSC) रसायन विज्ञान को बढ़ावा देने वाला दुनिया का एक अग्रणी संगठन है। 1841 में स्थापित यह संस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए मान्यता प्रदान करती है। इसकी सदस्यता मिलना किसी भी वैज्ञानिक के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ी प्रतिष्ठा की बात मानी जाती है।

डॉ. राव की इस सफलता पर कॉलेज के शिक्षकों और छात्रों ने उन्हें बधाई दी है, और इसे शोध के क्षेत्र में भविष्य की नई संभावनाओं का द्वार बताया है।

matribhumisamachar.com/tag/kanpur-news/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।