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बिहार राज्यसभा चुनाव: सियासी बिसात बिछी, 16 मार्च को वोटिंग; नितिन नवीन के दिल्ली शिफ्ट होने के संकेत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार की पांच राज्यसभा सीटों समेत देश की 37 सीटों पर चुनाव का बिगुल बज गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है, जिसके अनुसार बिहार के पांच सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। राज्य की सियासत में इस घोषणा के साथ ही जोड़-तोड़ और कयासों का दौर शुरू हो गया है।

चुनाव कार्यक्रम पर एक नजर

राज्यसभा चुनाव के लिए 26 फरवरी को आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। नामांकन और जांच की प्रक्रिया के बाद 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा, जिसके तुरंत बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू कर दी जाएगी।

सीटों का गणित: NDA की राह आसान, महागठबंधन की परीक्षा

बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्या बल (243 सीटें) के अनुसार, एक राज्यसभा सीट सुरक्षित करने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है।

  • भाजपा (89) और जदयू (85): अपने दम पर दो-दो सीटें आसानी से जीत सकते हैं।

  • राजद व विपक्षी दल: महागठबंधन के पास कुल 41 विधायकों का आंकड़ा है, जिससे वे केवल एक सीट निकाल पाने की स्थिति में हैं। दूसरी सीट के लिए उन्हें भारी उलटफेर या क्रॉस वोटिंग का सहारा लेना होगा।

नितिन नवीन को बड़ी जिम्मेदारी, राज्यसभा की रेस से बाहर?

राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा बांकीपुर विधायक नितिन नवीन को लेकर है। भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने नितिन नवीन को दिल्ली में ‘टाइप-8’ सरकारी आवास आवंटित किया गया है। यह आवास आमतौर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष स्तर के नेताओं को मिलता है। जानकारों का मानना है कि इस कदम से साफ है कि वे अब दिल्ली में संगठन की कमान संभालेंगे और राज्यसभा की दौड़ से बाहर हैं।

जदयू में ‘रिपीट’ पर सस्पेंस और चिराग की दावेदारी

जदयू कोटे से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर का कार्यकाल खत्म हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी होने के नाते उनके नाम चर्चा में हैं, लेकिन पार्टी के ‘दो टर्म’ के अघोषित नियम ने संशय बरकरार रखा है।

दूसरी ओर, चिराग पासवान ने पांचवीं सीट पर अपनी माता के लिए दावेदारी ठोक दी है। उनके पास 19 विधायक हैं, ऐसे में उन्हें एनडीए के अतिरिक्त वोटों की दरकार होगी। वहीं, उपेंद्र कुशवाहा के लिए दोबारा सदन पहुंचना फिलहाल चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

तेजस्वी यादव के लिए नेतृत्व की चुनौती

यह चुनाव राजद नेता तेजस्वी यादव के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। विपक्षी एकजुटता को बनाए रखते हुए अपनी एक सीट सुरक्षित करना और भविष्य के समीकरणों को साधना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

यह भी पढ़ें: बिहार की ताज़ा राजनीतिक खबरों और चुनाव विश्लेषण के लिए यहाँ क्लिक करें – matribhumisamachar.com/

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।