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कानपुर: शैक्षणिक सत्र 2026-27 का आध्यात्मिक आगाज, छात्रों को मिला सफलता का ‘मूलमंत्र’

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कानपुर | गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

शिक्षा के मंदिर में जब ज्ञान की देवी का आह्वान होता है, तो वातावरण स्वतः ही ऊर्जावान हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा आज कानपुर के स्थानीय विद्यालय परिसर में देखने को मिला, जहाँ नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 का शुभारंभ अत्यंत गरिमामय और आध्यात्मिक वातावरण में किया गया।

वैदिक रीति-रिवाज से सत्र का आगाज़

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती के विधिवत हवन-पूजन के साथ हुआ। वैदिक विद्वानों द्वारा किए गए मंत्रोच्चार की पवित्र ध्वनि से संपूर्ण विद्यालय परिसर गूँज उठा। इस सामूहिक पूजा-अर्चना का उद्देश्य छात्रों में बौद्धिक विकास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना था।

विद्यालय में माँ सरस्वती का हवन करते प्रबंधक और प्रधानाचार्य

वरिष्ठ जनों का मिला मार्गदर्शन

इस पावन अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य शंकर बाजपेयी ने अपनी उपस्थिति से छात्रों का उत्साहवर्धन किया। उनके साथ प्रधानाचार्य बृजमोहन कुमार सिंह और उपप्रधानाचार्या मंजूबाला श्रीवास्तव ने भी आहुति देकर सत्र की निर्विघ्न समाप्ति और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

प्रधानाचार्य का संदेश: > “नया सत्र केवल नई किताबों का नाम नहीं है, बल्कि यह नए संकल्पों और नई ऊंचाइयों को छूने का अवसर है। विद्यार्थियों को परिश्रम, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।”

तिलक लगाकर हुआ अभिनन्दन

विद्यालय की परंपरा को जीवंत रखते हुए, शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सभी छात्र-छात्राओं के मस्तक पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाकर उनका स्वागत किया। शिक्षकों ने न केवल उन्हें नए सत्र की शुभकामनाएँ दीं, बल्कि विद्यालय के नियमों और अनुशासन के महत्व से भी अवगत कराया।

प्रमुख बिंदु: एक नजर में

  • भक्तिमय माहौल: संपूर्ण परिसर भक्ति और उत्साह के रंग में रंगा नजर आया।

  • छात्रों में उत्साह: नए सत्र को लेकर बच्चों के चेहरों पर एक विशेष चमक और उमंग देखी गई।

  • प्रसाद वितरण: कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों और विद्यार्थियों को प्रसाद वितरित किया गया।

निष्कर्ष:

गुरुजनों के सानिध्य में शुरू हुआ यह नया सत्र विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और सफलता की नई इबारत लिखने वाला साबित होगा। विद्यालय प्रशासन ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के सिंचन पर भी विशेष बल देते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।