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सांवलिया सेठ मंदिर में नोटों की बारिश: पहले ही दिन निकले 11.11 करोड़, गिनते-गिनते थके कर्मचारी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चित्तौड़गढ़ | शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

राजस्थान के सुप्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया जी मंदिर में एक बार फिर आस्था और वैभव का अद्भुत संगम देखने को मिला है। कृष्णपक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर गुरुवार को जब ठाकुरजी का राजभोग आरती के बाद भंडार (दान पात्र) खोला गया, तो नोटों की गड्डियों का अंबार लग गया। पहले चरण की गणना में ही 11 करोड़ 11 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि सामने आई है।

कड़ी सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच गणना

मंदिर मंडल के अनुसार, यह तो बस शुरुआत है। गणना की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन के अधिकारियों, मंदिर मंडल के पदाधिकारियों और विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों की तैनाती की गई है। पूरी प्रक्रिया की सीसीटीवी कैमरों और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मॉनिटरिंग की जा रही है।

मुख्य अपडेट्स: क्या-क्या हुआ अब तक?

  • पहले चरण का आंकड़ा: 11 करोड़ 11 लाख रुपये नकद।

  • अमावस्या मेले का इंतजार: शुक्रवार को अमावस्या मेला होने के कारण श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए गणना रोक दी गई है।

  • दूसरे चरण की शुरुआत: शेष राशि की गिनती शुक्रवार शाम या शनिवार से दोबारा शुरू की जाएगी।

  • सोना-चांदी अभी शेष: दान पात्र से निकले सोने और चांदी के आभूषणों का वजन और मूल्यांकन दूसरे चरण में किया जाएगा।

क्यों खास है इस बार का चढ़ावा?

सांवलिया सेठ को क्षेत्र के लोग अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ मानते हैं। हाल के महीनों में यहाँ दान का ग्राफ लगातार बढ़ा है। मार्च 2026 के आंकड़ों को देखें तो फाल्गुन महीने में कुल चढ़ावा 46 करोड़ रुपये के पार निकल गया था। इस बार जिस तरह से पहले ही चरण में 11 करोड़ से अधिक की राशि मिली है, अनुमान लगाया जा रहा है कि इस महीने का कुल कलेक्शन पिछले कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर सकता है।

भेंटकक्ष और ऑनलाइन दान का भी लगेगा अंबार

भंडार के अलावा मंदिर के भेंटकक्ष (Office counter) में जमा होने वाली नकद राशि, मनीऑर्डर और ऑनलाइन माध्यम से आने वाले दान की गणना अंतिम चरण में की जाएगी। मंदिर प्रशासन का कहना है कि अगले 2-3 दिनों में अंतिम आधिकारिक आंकड़ा जारी किया जाएगा।

सांवलिया सेठ का इतिहास: चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया में स्थित यह मंदिर मेवाड़ के सबसे प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूर्ण होती है, जिसके फलस्वरुप भक्त अपनी आय का एक हिस्सा यहाँ अर्पित करते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।