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मुरादाबाद: मंगूपुरा में 22 साल पुराने विवाद का अंत, 10 हेक्टेयर सरकारी जमीन से हटा अवैध मदरसा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ | शनिवार, 9 मई 2026

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में शनिवार को जिला प्रशासन और मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने एक बड़ी संयुक्त कार्रवाई करते हुए नेशनल हाईवे किनारे स्थित ‘जामिया अरबिया हयातुल उलूम’ मदरसे को ध्वस्त कर दिया। करीब 10 हेक्टेयर (लगभग 25 एकड़) बेशकीमती जमीन पर बने इस मदरसे पर पिछले 5 दशकों से विवाद चल रहा था। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस बुलडोजर कार्रवाई ने दशकों पुराने कानूनी और तकनीकी पेचों को समाप्त कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट से भी हार चुकी थी मदरसा कमेटी

मंगूपुरा क्षेत्र में स्थित इस जमीन का मालिकाना हक मुरादाबाद विकास प्राधिकरण का था, जिसे ‘नया मुरादाबाद’ आवासीय योजना के लिए अधिग्रहित किया गया था। मदरसा कमेटी ने इस जमीन को लेकर स्थानीय कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। प्राधिकरण करीब डेढ़ दशक पहले ही सुप्रीम कोर्ट से यह केस जीत चुका था, लेकिन मदरसा कमेटी बार-बार तकनीकी आपत्तियां लगाकर कब्जे की प्रक्रिया को बाधित कर रही थी। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मदरसा कमेटी की याचिका खारिज कर प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया था।

ज्वाइंट ऑपरेशन: 5 घंटे में जमीन हुई अतिक्रमण मुक्त

कार्रवाई को अंजाम देने के लिए जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया, एसएसपी सतपाल अंतिल और एमडीए वीसी अनुभव सिंह ने एक विशेष टीम का गठन किया था। शनिवार सुबह जब प्राधिकरण की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची, तो सुरक्षा के लिहाज से भारी पीएसी और पुलिस बल तैनात किया गया था। मझोला थाने से कुछ ही दूरी पर स्थित इस विवादित ढांचे को ढहाने के बाद, प्राधिकरण ने तुरंत जमीन की घेराबंदी (बाउंड्री वॉल) का काम शुरू कर दिया है।

क्या होगा इस जमीन का भविष्य?

एमडीए के अधिकारियों के अनुसार, इस 10 हेक्टेयर जमीन का उपयोग अब ‘नया मुरादाबाद’ योजना के विस्तार और विकास कार्यों के लिए किया जाएगा। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अदालती आदेशों के उल्लंघन और अवैध कब्जों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।