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बदरीनाथ आस्था पथ पर महकेगा रुद्राक्ष वन: आध्यात्म और प्रकृति का अनूठा संगम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

देहरादून । रविवार, 10 मई 2026

विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब भक्ति का मार्ग और भी दिव्य होने जा रहा है। उत्तराखंड वन विभाग ने बदरीनाथ धाम के ‘आस्था पथ’ पर एक भव्य रुद्राक्ष वन विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। यह पहल न केवल तीर्थयात्रियों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगी, बल्कि हिमालयी क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती देगी।

50 हेक्टेयर में फैलेगी रुद्राक्ष की महिमा

अलकनंदा वन प्रभाग द्वारा इस परियोजना के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। योजना के अंतर्गत:

  • विभिन्न चिन्हित स्थानों पर कुल 50 हेक्टेयर भूमि पर रुद्राक्ष के पौधों का रोपण किया जाएगा।

  • सिर्फ रुद्राक्ष ही नहीं, बल्कि मार्ग में पीपल, बरगद, भोजपत्र, बेलपत्री, आम, देवदार, सुरांई और पदम जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले वृक्ष भी लगाए जाएंगे।

  • इसका मुख्य उद्देश्य तीर्थयात्रियों को पूरे यात्रा मार्ग में एक ‘आध्यात्मिक वातावरण’ का जीवंत अनुभव कराना है।

ऑलवेदर रोड से हुई क्षति की होगी भरपाई

विदित हो कि ऑलवेदर रोड परियोजना के निर्माण के दौरान ऋषिकेश से बदरीनाथ तक हाईवे किनारे स्थित कई प्राचीन और छायादार वृक्ष नष्ट हो गए थे। विशेषकर नंदप्रयाग, बिरही, भीमतला, पाखी और हेलंग जैसे पड़ावों पर यात्री इन पेड़ों की छांव में विश्राम करते थे। नई योजना इन खोए हुए प्राकृतिक विश्राम स्थलों को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है।

वन विभाग का विजन

वन संरक्षक (गढ़वाल) आकाश वर्मा के अनुसार, बदरीनाथ धाम के आस्था पथ को धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से एक विशेष स्वरूप देने का प्रस्ताव तैयार है। उन्होंने बताया कि इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद, बदरीनाथ यात्रा मार्ग केवल एक सड़क मार्ग न रहकर आस्था, प्रकृति और संस्कृति का एक वैश्विक केंद्र बनेगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।