सेल ने वैश्विक उपस्थिति को मजबूत बनाने के लिए दुबई में प्रतिनिधि कार्यालय का उद्घाटन किया
भारत के सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक स्टील अथॉरिटी ऑफ…
एपीडा ने भारतीय आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अबू धाबी में ‘इंडियन मैंगो मेनिया 2025’ का आयोजन किया
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात…
नीति आयोग ने भारत को वैश्विक रासायनिक विनिर्माण महाशक्ति बनाने के लिए महत्वाकांक्षी कार्ययोजना बनाई
नीति आयोग ने "रसायन उद्योग: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी…
इस्पात उत्पादों पर गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के संबंध में इस्पात मंत्रालय का स्पष्टीकरण आदेश
इस्पात मंत्रालय ने 151 बीआईएस मानकों के प्रवर्तन के लिए गुणवत्ता नियंत्रण…
एचडी कुमारस्वामी ने औद्योगिक और खनिज साझेदारी के लिए संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था मंत्री से की मुलाकात
केंद्रीय इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भारत-संयुक्त अरब अमीरात व्यापक आर्थिक…
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को मंजूरी दी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विनिर्माण क्षेत्र पर…
मध्यम वर्गीय परिवार नहीं फंसे ऋण के जाल में
- प्रहलाद सबनानी हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो दर…
अधिसूचना सं. 44/2025-सीमा शुल्क (गै.टै.) खाद्य तेल, पीतल स्क्रैप, सुपारी, सोना और चांदी के लिए टैरिफ मूल्य के निर्धारण के संबंध में
सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 (1962 का 52) की धारा 14 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, इस बात से संतुष्ट होने पर कि ऐसा करना आवश्यक एवं समीचीन है, एतद्द्वारा, भारत सरकार, वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) की अधिसूचना सं. 36/2001-सीमा शुल्क (गै. टै.), दिनांक 3 अगस्त, 2001, जिसे का.आ. 748 (अ), दिनांक 3 अगस्त, 2001 के तहत भारत के राजपत्र, असाधारण के भाग-II, खंड-3, उपखंड (ii) में प्रकाशित किया गया था, में निम्नलिखित संशोधन करता है, अर्थात्:- उक्त अधिसूचना में, सारणी-1, सारणी-2 और सारणी-3 के स्थान पर निम्नलिखित सारणियाँ प्रतिस्थापित की जाएँगी, अर्थात्:- "सारणी-1 क्रम. सं.…
मोदी सरकार का लक्ष्य है कि अगले 5 वर्षों में हर गांव में हो कोऑपरेटिव : अमित शाह
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष - 2025 के उपलक्ष्य में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों के साथ "मंथन बैठक” की अध्यक्षता की। बैठक का आयोजन सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया। "मंथन बैठक” का सफलतापूर्वक आयोजन सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बैठक में देशभर के सहकारिता मंत्रियों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और सहकारिता विभागों के सचिवों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मंथन बैठक का उद्देश्य भारत में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए चल रही योजनाओं की समीक्षा, उपलब्धियों का आंकलन और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करना है। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना देश में बहुत पुराने सहकारिता के संस्कार को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ नए परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखकर की है। उन्होंने कहा कि देश में सामाजिक परिवर्तन और नया परिदृश्य नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद आया है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 60-70 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनके पास कई पीढ़ियों तक जीवन जीने की मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थीं। उन्होंने कहा कि 2014 से 2024 तक के 10 साल के कालखंड में ही मोदी सरकार ने इन करोड़ों लोगों का जीवनस्वप्न पूरा कर दिया और इन्हें घर, शौचालय, पीने का पानी, अनाज, स्वास्थ्य, गैस सिलिंडर आदि सुविधाएं प्रदान कर दीं। श्री शाह ने कहा कि ये करोड़ों लोग अब अपने जीवन को और बेहतर बनाने के लिए उद्यम करना चाहते हैं, लेकिन इनके पास पूंजी नहीं है और इन करोड़ों लोगों की छोटी-छोटी पूंजी से बड़ा काम करने का एकमात्र रास्ता सहकारिता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाले देश के लिए दो चीज़ें बेहद ज़रूरी हैं – जीडीपी और जीएसडीपी का विकास और 140 करोड़ लोगों के लिए काम का सृजन करना। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति के लिए काम के सृजन के लिए सहकारिता के सिवा कोई अन्य विकल्प नहीं है और इसीलिए 4 साल पहले बहुत दूरदर्शिता के साथ सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई। श्री शाह ने कहा कि हमें संवेदनशीलता के साथ देश के करोड़ों छोटे किसानों और ग्रामीणों के कल्याण के लिए सहकारिता को पुनर्जीवित करना ही होगा, क्योंकि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। श्री अमित शाह ने कहा कि इस चिंतन और मंथन से तभी भला हो सकता है जब देश के 140 करोड़ लोग रोज़गार प्राप्त कर परिश्रम के साथ अपना जीवन व्यतीत करें और इसे सफल बनाने के लिए भारत सरकार ने 60 पहल की हैं। उन्होंने कहा कि इन पहल में से एक महत्वपूर्ण पहल है राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस का निर्माण, जिसकी मदद से हम वैक्यूम ढूंढ सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस इसीलिए बनाया गया है कि राष्ट्रीय, राज्य, ज़िला और तहसील स्तर की सहकारी संस्थाएं मिलकर ये देख सकें कि किस राज्य के किस गांव में एक भी सहकारी संस्था नहीं है। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य है कि अगले 5 साल में देश में एक भी गांव ऐसा न रहे, जहां एक भी कोऑपरेटिव न हो और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सहकारी डेटाबेस का उपयोग करना चाहिए। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत में सहकारिता आंदोलन के छिन्न-भिन्न होने के पीछे 3 मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि हमने समय के साथ कानून नहीं बदले, जो अब मोदी सरकार ने बदल दिए हैं। हमने सहकारिता की गतिविधियों को जोड़ा या समय के साथ बदला नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले सहकारिता में सारी भर्तियां भाई-भतीजावाद से होती थीं और इसीलिए त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी का विचार किया गया। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने आग्रह किया कि हर राज्य की कम से कम एक सहकारिता प्रशिक्षण संस्था, त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े और राज्य के कोऑपरेटिव आंदोलन की ट्रेनिंग की पूरी हॉलिस्टिक व्यवस्था त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के माध्यम से ही हो। श्री शाह ने कहा कि कुछ ही समय में राष्ट्रीय सहकारिता नीति की घोषणा भी होगी जो 2025 से 2045 तक, यानी लगभग आजादी की शताब्दी तक अमल में रहेगी। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय सहकारिता नीति के तत्वाधान में ही हर राज्य की सहकारिता नीति वहां की सहकारिता की स्थिति के अनुरूप बने और इसके लक्ष्य भी निर्धारित हों। उन्होंने कहा कि तभी आज़ादी की शताब्दी तक हम एक आदर्श कोऑपरेटिव स्टेट बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि पूरे देश में सहकारिता के क्षेत्र में अनुशासन, नवाचार और पारदर्शिता लाने का काम मॉडल एक्ट से होगा। उन्होंने कहा कि 2 लाख पैक्स के निर्णय के तहत वित्त वर्ष 2025-26 के लक्ष्य को फरवरी माह में ही समाप्त कर दिया जाए, तभी हम 2 लाख पैक्स के लक्ष्य तक समय से पहुंच सकेंगे। श्री अमित शाह ने कहा कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसायटी पर हमें विशेष ध्यान देने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि अब कोऑपरेटिव बैंक को हमने बैंकिंग एक्ट के तहत ले आए हैं और भारतीय रिज़र्व बैंक ने भी लचीली अप्रोच अपनाते हुए हमारी कई समस्याएं दूर की हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बची समस्याएं तभी दूर हो सकती हैं, जब हम पारदर्शिता के साथ बैंक का संचालन और कर्मचारियों की भर्ती करें। उन्होंने क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी और अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के संचालन में और अधिक पारदर्शिता लाने की ज़रूरत पर बल दिया। केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि सभी राज्यों के सहकारिता मंत्री अपने-अपने राज्यों में कृषि मंत्रियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें, ताकि आम जनमानस के साथ-साथ धरती माता का स्वास्थ्य भी सुधरे। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि Cooperation Amongst Cooperatives का गुजरात में बहुत अच्छा और सफल प्रयोग हुआ है। उन्होंने कहा कि यह हमारी राष्ट्रीय क्षमता की वृद्धि और संवर्धन, राष्ट्रीय स्तर पर सहकारिता की ताकत बढ़ाने और कोऑपरेटिव की शक्ति का संवर्धन करने के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण पहल है। बैठक के दौरान सहकारिता मंत्रालय द्वारा की गई पहल के व्यापक मूल्यांकन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं, नीति सुझावों और कार्यान्वयन रणनीतियों के सार्थक आदान-प्रदान की सुविधा मिल सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ बैठक में किए गए विचार-विमर्श ने समावेशी विकास को प्राप्त करने में आपसी सहयोग और समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। बैठक में चर्चा के मुख्य बिंदुओं में देशभर में 2 लाख बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (M-PACS) की स्थापना की प्रगति और ग्रामीण सेवा वितरण को बढ़ाने के लिए डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों को बढ़ावा देना शामिल है। सहकारी क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के कार्यान्वयन पर भी बैठक के दौरान विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में भाग ले रहे प्रतिनिधियों ने "Cooperation…
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ ने युवाओं के लिए लॉन्च किया मार्केट-लिंक्ड प्रोडक्ट
~ सिर्फ 1,000 रुपए की मासिक प्रीमियम से शुरू होने वाला किफायती…
निर्मला सीतारामन विकास के लिए वित्तपोषण पर संयुक्त राष्ट्र के चौथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (एफएफडी4) को संबोधित करेंगी
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन 30 जून से 5 जुलाई 2025 तक स्पेन, पुर्तगाल और…
राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड बनने से 3-4 साल में ही निज़ामाबाद की हल्दी दुनिया के अधिकतर देशों में पहुँचेगी : अमित शाह
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज तेलंगाना के…
