भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को अक्सर आधुनिकीकरण, रेलवे, प्रशासनिक ढाँचे और वैश्विक व्यापार से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि यह तथाकथित विकास वास्तव में भारत के संसाधनों के व्यवस्थित दोहन और आर्थिक विनाश की प्रक्रिया थी। अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक …
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