भारत की स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक भूमि पर दो शक्तिशाली विचारधाराएँ उभरीं— महात्मा गांधी का ‘हिंद स्वराज’ (1909) और वीर सावरकर का ‘हिंदुत्व’ (1923)। दोनों ही भारत की मुक्ति, अस्मिता (Identity) और राष्ट्र-निर्माण की बात करते हैं, लेकिन उनके रास्ते, साधन और परिभाषाएँ मूलतः भिन्न हैं। जहाँ गांधी भारत की आत्मा …
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