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स्वास्थ्य खर्च में कमी एनएचए 2018-19 के मजबूत आंकड़ों पर आधारित है : केंद्र सरकार

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नई दिल्ली (मा.स.स.). राष्ट्रीय स्वास्थ्य खातों (एनएचए) में विशेष रूप से जेब खर्च में कमी के दावे में त्रुटियों का सुझाव देने वाली समाचार रिपोर्ट भ्रामक और गलत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य खाते (एनएचए) देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर किए गए व्यय पर विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। ये अनुमान महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये न केवल देश की मौजूदा स्वास्थ्य प्रणाली का प्रतिबिंब हैं बल्कि सरकार को विभिन्न स्वास्थ्य वित्त पोषण संकेतकों में हुई प्रगति की निगरानी करने में सक्षम बनाते हैं।

हाल के एनएचए अनुमान (2018-19) में आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (ओओपीई) में पर्याप्त कमी दिखाई गई है, जो नागरिकों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। इस डेटा को एक निजी भारतीय विश्वविद्यालय में काम कर रहे स्वास्थ्य अर्थशास्त्र के एक विशेषज्ञ द्वारा “धोखा” कहना और मीडिया के कुछ वर्गों में उद्धृत, औचित्य और तर्कसंगत आधार से रहित है। आइए इन अनुमानों – राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) के आंकड़ों के आधार पर उठाए गए सवालों से शुरू करते हैं। ओओपीई के लिए सूचना का मुख्य स्रोत 2017-18 के एनएसओ डेटा पर आधारित था जबकि पिछले अनुमान 2014 पर आधारित थे। 71वें और 75वें दौर के दोनों सर्वेक्षण घरों के चयन के लिए एक ही नमूना डिजाइन का उपयोग करते हैं ताकि यह दोनों दौर की तुलनात्मकता सुनिश्चित कर सके।

इसके अलावा 2017-18 का डेटा एक साल का सर्वेक्षण था जबकि 2014 छह महीने की अवधि में किया गया था। विस्तृत समयावधि में किये जाने के कारण 2017-18 का सर्वेक्षण निश्चित रूप से पिछले सर्वेक्षण की तुलना में अधिक मजबूत था। और, जबकि उन्हीं विशेषज्ञों ने 2014 के आंकड़ों को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था, 2017-18 के सर्वेक्षण पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करना वास्तव में मनमाना है।इस तरह की आलोचना उनके विशिष्ट तर्क को आगे बढ़ाने के लिए त्रुटिपूर्ण जुड़ाव और डेटा के चयनात्मक चयन पर आधारित है। दावे के आधार के रूप में, “समस्याग्रस्त लगता है / असंभव लगता है” जैसे परिकल्पना, काल्पनिक असहमति नहीं तो कुछ भी नहीं है।

सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग में वृद्धि एनएसओ 2017-18 का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू रहा है। प्रतिष्ठित आर्थिक और राजनीतिक साप्ताहिक में मुरलीधरन इत्यादि द्वारा प्रकाशित अध्ययन (2020) में एनएसएस दौरों पर भी 2017-18 में ओओपीई में गिरावट देखी गई है।इसके अलावा, वे देखते हैं कि यह गिरावट दो एनएसएस दौरों के बीच आउट पेशेंट और इनपेशेंट सेवाओं के लिए सार्वजनिक सुविधाओं के उपयोग में वृद्धि से प्रेरित है। वे यह भी पाते हैं कि न केवल सार्वजनिक सुविधाओं के उपयोग में वृद्धि हुई है बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं में औसत ओओपीई में भी गिरावट आई है। एनएसएस के उपलब्ध साक्ष्य सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के उपयोग में बढ़ती प्रवृत्ति को भी दर्शाते हैं।

एनएसएस के अनुसार, पिछले 15 दिनों में चिकित्सा सलाह लेने वालों में सरकारी सुविधाओं के उपयोग में लगभग 5% की वृद्धि हुई है। अस्पताल में भर्ती होने के मामले में, यह वृद्धि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 4% और शहरी क्षेत्रों में 3% है। प्रसव के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी सुविधाओं की हिस्सेदारी में 13% और शहरी क्षेत्रों में 6% की वृद्धि हुई है। साथ ही, अस्पताल में भर्ती होने के लिए सरकारी सुविधाओं में औसत चिकित्सा व्यय में 20% से अधिक की गिरावट आई है। संस्थागत प्रसव के मामले में शहरी क्षेत्रों में 9% और ग्रामीण क्षेत्रों में 16% की गिरावट आई है।

कुछ विशेषज्ञों ने अस्पताल में भर्ती होने की दरों में गिरावट पर भी सवाल उठाया है, उनका दावा है कि इसके लिए “कोई तार्किक स्पष्टीकरण नहीं” मिला है। वे जो देखने या स्वीकार करने में विफल रहे हैं, वह है इनपेशेंट देखभाल से आउट पेशेंट देखभाल में वैश्विक बदलाव, कई देशों ने विशेष रूप से इस बदलाव को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियों को डिजाइन किया है। पिछले 15 दिनों में चिकित्सा सलाह के आधार पर उपचार लेने वालों में आउट पेशेंट चाहने वालों के प्रतिशत में वृद्धि। एनएसएस 71वें राउंड और एनएसएस 75वें राउंड के बीच चिकित्सा सलाह के आधार पर उपचार लेने वालों में, आउट पेशेंट देखभाल चाहने वाले लोगों की हिस्सेदारी में लगभग 5% की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि इनपेशेंट सेवाओं से आउट पेशेंट सेवाओं की ओर बदलाव को इंगित करती है जहां लोग आउट पेशेंट देखभाल के साथ इनपेशेंट देखभाल को प्रतिस्थापित कर रहे हैं।

एनएचए 2018-19 की चल रही आलोचना तथ्यों और ठोस कारणों की अनदेखी करने और दूसरों पर औचित्य छोड़ने का एक विशिष्ट प्रथम दृष्टया उदाहरण है। सरकारी स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि की एक आलोचना पूंजीगत व्यय को शामिल करना है। यदि हम वर्तमान स्वास्थ्य व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के रूप में देखें, तो भी इसमें 2013-14 से लगातार वृद्धि हुई है। सरकार का मौजूदा स्वास्थ्य खर्च 2013-14 और 2017-18 के बीच लगातार बढ़ रहा है। सकल घरेलू उत्पाद के हिस्से के रूप में, इसमें समान अवधि के लिए 10% से अधिक की वृद्धि हुई है।

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