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अमित शाह ने देश में पहली बार हिंदी में एमबीबीएस के पाठ्यक्रम का किया शुभारंभ

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नई दिल्ली (मा.स.स.). केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज मध्य प्रदेश के भोपाल में देश में पहली बार हिंदी में MBBS के पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज का दिन आज़ादी के अमृत महोत्सव के वर्ष में भारत के चिकित्सा क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिसे आने वाले समय में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आज का दिन देश के शिक्षा क्षेत्र के पुनर्जागरण और पुनर्निर्माण का दिन है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने नई शिक्षा नीति में प्राथमिक, टेक्निकल और मेडिकल शिक्षा में बच्चे की मातृभाषा को महत्व देकर एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, गुजराती, बंगाली आदि सभी क्षेत्रीय भाषाओं में मेडिकल और इंजीनियरिंग की शिक्षा उपलब्ध कराने का आह्वान किया था और मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने सबसे पहले मोदी जी की इस इच्छा की पूर्ति की है।

अमित शाह ने कहा कि आज मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू हो रही है और जल्दी ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी हिंदी में शुरू होगी और देशभर में 8 भाषाओं में इंजीनियरिंग की पुस्तकों का अनुवाद शुरू हो चुका है और कुछ ही समय में देश के सभी विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में टेक्निकल और मेडिकल शिक्षा लेने की शुरूआत करेंगे। उन्होंने कहा कि आज का दिन इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज से हमारे बच्चों को अपनी मातृभाषा में टेक्निकल और मेडिकल शिक्षा तो मिलेगी ही इसके साथ ही वे आगे अनुसंधान भी अपनी भाषा में कर सकेंगे। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी की नई शिक्षा नीति को सबसे पहले और अच्छे तरीके से मध्य प्रदेश ने ज़मीन पर उतारा है। शाह ने विद्यार्थियों से कहा कि किसी भी इंसान की सोचने की प्रक्रिया अपनी मातृभाषा में ही सबसे अच्छी होती है और मातृभाषा में की गई बात दिल के अंदर तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि सोचने, संशोधन, अनुसंधान, तर्क, विश्लेषण और निर्णय पर पहुंचने की प्रक्रिया हमारा मन हमारी मातृभाषा में ही करता है। उन्होंने कहा कि अगर पढ़ाई-लिखाई और अनुसंधान मातृभाषा में हो तो भारत के विद्यार्थी दुनिया के किसी भी देश के विद्यार्थियों से कम नहीं हैं और वे पूरे विश्व में अनुसंधान के क्षेत्र में भी भारत का नाम रौशन करेंगे।

शाह ने कहा कि 21वीं सदी में कुछ ताकतों ने ब्रेन ड्रेन की थ्योरी अपनाई और आज प्रधानमंत्री मोदी ब्रेन ड्रेन की थ्योरी को ब्रेन गेन थ्योरी में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज मोदी जी के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति के माध्यम से हमारी भाषाओं को महत्व देने की शुरूआत हुई है। जेईई, नीट और यूजीसी परीक्षाओं को देश की 12 भाषाओं में आयोजित करने की हमने शुरुआत की है। इसी तरह कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट देश की 13 भाषाओं में आयोजित किया जा रहा है और 10 राज्यों ने इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम का तमिल, तेलुगू, मराठी, बंगाली, मलयालम और गुजराती में अनुवाद करके इसकी शिक्षा शुरू की है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अपनी भाषाओं में पढ़ाई से निश्चित रूप से विद्यार्थियों की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने देशभर के विद्यार्थियों से कहा कि आप भाषाई हीनभावना से बाहर आएं क्योंकि आज देश में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है और आप अपनी भाषा में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक मंचों पर अपना भाषण अपनी राजभाषा हिंदी में देकर पूरी दुनिया को एक संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि जब मोदी जी वैश्विक मंच पर हिंदी में बोलते हैं तो देशभर के युवाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने टेक्निकल और मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में कई परिवर्तन किए हैं। शाह ने कहा कि 2014 में मेडिकल कॉलेज 387 थे जो बढ़कर 596 हो गए हैं, एमएमबीएस सीटों की संख्या को 51 हज़ार से बढ़ाकर 79 हज़ार कर दिया गया है। आईआईटी 16 थे जो अब 23 हैं, आईआईएम 13 थे जो अब 20 हैं और आईआईआईटी 9 थे जो अब बढ़कर 25 हो गए हैं। 2014 में देश में कुल विश्वविद्यालय 723 थे जिन्हें बढ़ाकर 1043 करने का काम केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है। उन्होंने कहा कि मोदी जी द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति के माध्यम से हमारी भाषाओं के गौरव को प्रस्थापित करने और हमारी भाषाओं में ही टेक्निकल, मेडिकल और कानून की पढ़ाई की व्यवस्था पूरे देश में करने से देश में क्षमता की क्रांति आने वाली है। शाह ने कहा कि अंग्रेजी का प्रचार-प्रसार करने वाले लोगों ने भाषा को बौद्धिक क्षमता के साथ जोड़ दिया, लेकिन भाषा और बौद्धिक क्षमता का आपस में कोई संबंध नहीं है। भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है जबकि बौद्धिक क्षमता बच्चे को ईश्वर ने दी है जिसे शिक्षा से निखारा जा सकता है और अगर मातृभाषा में शिक्षा होती है तो बौद्धिक क्षमता को निखारने में बहुत फायदा मिलता है। उन्होंने कहा कि आज की इस शुरूआत से अनुसंधान के क्षेत्र में भारत विश्व में बहुत आगे जाएगा और हमारे बच्चों की बौद्धिक क्षमता का भी विश्व को परिचय होगा।

 

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