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इंटरनेशनल सोलर अलायंस और आईसीएओ के बीच हुआ समझौता

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नई दिल्ली (मा.स.स.). मॉन्ट्रियाल में आयोजित इंटरनेशनल सिविल एवियेशन ऑर्गनाइजेशन (आईसीएओ) सभा के 42वें सत्र से अलग एक समारोह में, इंटरनेशनल सोलर अलायंस तथा आईसीएओ के बीच एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये गये। यह हस्ताक्षर नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, फ्रांस के यातायात मंत्री मीशियो क्लेमेंट ब्यून, आईसीएओ परिषद के अध्यक्ष सल्वोटोर साशीतानो की उपस्थिति में किये गये। समझौता-ज्ञापन पर आईसीएओ के महासचिव जुआन कार्लोस सालाज़ार और आईएसए के संचालन प्रमुख जोशुआ वायक्लिफ ने किये।

ज्योतिरादित्य सिंधिया जब मई 2022 में मॉन्ट्रियाल गये थे, तो उस समय आईसीएओ के अध्यक्ष के साथ अपनी मुलाकात के दौरान उन्होंने यह विचार व्यक्त किया था कि आईसीएओ को आईएसए का साझीदार संगठन बन जाना चाहिये। चार माह की अवधि में समझौता-ज्ञापन पर सहमति बनी और उसे अंतिम रूप दिया गया। उसके बाद भारत और फ्रांस के मंत्रियों के समक्ष आईएसए और आईसीएओ ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये। याद रहे, पेरिस में कॉप 21 के समय 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंक्वा होलांदे ने जो उत्साहवर्धक पहल की थी, तो यह समझौता-ज्ञापन उसी पहल को आगे बढ़ाने का काम करेगा।

आईएसए एक ऐसा गठबंधन है, जिसके लिये 121 देशों ने हस्ताक्षर किये हैं। इसमें 32 साझेदार संगठन भी शामिल हैं, जिनमें कई संयुक्त राष्ट्र संगठन भी हैं। आईएसए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिये सौर ऊर्जा की उपयुक्त खपत की दिशा में काम करता है। आईएसए का प्रयास है कि सदस्य देशों को नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल में सस्ते और परिवर्तनगामी समाधान दिये जायें। इसके लिये एलडीसी और एसआईडीसी के प्रभाव के मद्देनजर विशेष ध्यान दिया जाता है।

भारत ने कॉप 26 में संकल्प लिया था कि वह 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करेगा। उसकी समझ मानव-केंद्रित है, सम्मानपूर्ण और राष्ट्रीय अस्मिता के सिद्धांतों पर आधारित है तथा सबके प्रति कटिबद्ध है। भारत ने यह भी संकल्प किया है कि 2022 तक 175 मेगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित करने तथा 2030 तक उत्सर्जन गहनता में 33-35 प्रतिशत तक की कटौती करने का लक्ष्य हासिल कर लेगा। इस तरह उन सभी गांवों और समुदायों तक सौर ऊर्जा पहुंचा दी जायेगी, जो अब तक इससे विहीन थे। भारत में कोच्चि अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन वर्ष 2015 में ही विश्व का पहला पूरी तरह से सौर ऊर्जा युक्त हवाई अड्डा बन चुका है।

फ्रांस के समर्थन से भारत ने सौर ऊर्जा के क्रियान्वयन के लिये अवसंरचना की सुविधा बढ़ाने के संबंध में देशों को आमंत्रित किया है। गठबंधन ने एक खरब डॉलर के निवेश का संकल्प किया है। इसी तरह गठबंधन दूर-दराज के इलाकों और दुर्गम समुदायों तक बिजली पहुंचाने के क्रम में सौर ऊर्जा की कीमत कम करने की दिशा में काम कर रहा है।

आईसीएओ कई पहलों और लक्ष्यों के जरिये विमानन सेक्टर में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिये प्रतिबद्ध है। इस रचनात्मक पहल के मद्देनजर, आईएसए और आईसीएओ के बीच समझौता-ज्ञापन के माध्यम से होने वाली साझेदारी बहुत सही वक्त पर हो रही है। इस तरह सौर ऊर्जा के इस्तेमाल के सम्बंध में सदस्य देशों की क्षमता विकसित करने के लिये अधिसंख्य काम किये जा सकेंगे। यह समझौता सूचना देने, सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता पैदा करने, क्षमता बढ़ाने और परियोजनाओं को प्रस्तुत करने का काम करेगा। इसके जरिये सभी सदस्य देशों के बीच विमानन सेक्टर को सौर ऊर्जा से युक्त करने में मदद मिलेगी।

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