मंगलवार, सितंबर 15 2026 | 05:21:13 PM

दावा : डायबिटीज में खा सकते हैं गुड़, नहीं होगा नुकसान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

झांसी. डायबिटीज की बीमारी लोगों में तेजी से बढ़ती जा रही है. डायबिटीज जिसे आम भाषा में शुगर की बिमारी भी कहा जाता है .लगातार लोगों को अपना शिकार बना रही है. इस बिमारी से जुड़ी कई ऐसी बातें भी हैं जिन पर विश्वास करना थोड़ा मुश्किल होता है. ऐसी ही एक बात है की डायबिटीज के मरीज चीनी की जगह गुड़ खा सकते हैं या नहीं. इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने बात की झांसी स्थित बुंदेलखंड आयुर्वेदिक कॉलेज की डॉक्टर प्रीति सागर से.

डॉ. प्रीति सागर ने कहा कि डायबिटीज के मरीज गुड़ खा सकते हैं यह बात उसे जमाने में सही थी जब गुड़ शुद्ध मिला करता था. लेकिन, आज के समय में शुद्ध गुड़ मिलना दूर की बात हो गई है. आजकल तो जो गुड मिलता है वह चीनी से भी ज्यादा घातक हो गया है. इसलिए गुड़ खाने से परहेज ही करना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि डायबिटीज लाइफस्टाइल की वजह से होने वाली बीमारी है. डॉ प्रीति सागर ने कुछ जरूरी प्वाइंट बताएं जिनकी वजह से लोगों को डायबिटीज हो रही है.

प्रॉपर डायट ना लेना : आज के समय में लोग प्रॉपर डाइट नहीं लेते हैं. खाने में सभी प्रकार के विटामिन और मिनरल का बैलेंस ना होने से कुछ तत्वों की कमी रह जाती है जिस वजह से डायबिटीज हो जाता है.

खराब लाइफस्टाइल : आधुनिक समय में लोगों की लाइफ स्टाइल भी खराब होती जा रही है. लोगों के सोने और जागने का कोई समय तय नहीं है. इस वजह से एक्सरसाइज भी नहीं कर पाते हैं. यह भी कारण है कि लोग डायबिटीज के मरीज होते जा रहे हैं.

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शरीर में कफ : शरीर में कफ का ज्यादा बना भी डायबिटीज का कारण हो सकता है. इसका इलाज आयुर्वेद में संभव है. अगर लोगों को शरीर में कफ ज्यादा बनता दिखाई दे तो वह आयुर्वेद चिकित्सक से जरूर मिले.

प्रदूषण : तेजी से फैलता प्रदूषण भी डायबिटीज की बीमारी का कारण बन चुका है. शुद्ध हवा की कभी भी इस बीमारी को बढ़ावा देती है.

शारीरिक रूप से ऐक्टिव ना रहना: शारीरिक रूप से एक्टिव ना रहना भी लोगों के लिए आफत बनता जा रहा है. यह भी डायबिटीज का कारण बनता जा रहा है.

साभार : न्यूज़18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।