सोमवार, सितंबर 14 2026 | 07:43:44 AM

केंद्र सरकार डीजल गाड़ियों पर लगा सकती है 10% अतिरिक्त टैक्स

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारत में डीजल इंजन वाले वाहनों को खरीदना जल्द ही महंगा हो सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की ओर से इसपर तीन बयान दिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री की ओर से डीजल इंजन पर क्या बयान दिए गए हैं। यह हम इस खबर में आपको बता रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान मंच से क्या कहा?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को दिल्ली में सियाम की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री की ओर से जानकारी दी गई कि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है। इसके कारण हमारे स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर हो रहा है। मैंने पिछले आठ-10 दिन से एक पत्र तैयार किया हुआ है, जिसे मैं आज शाम को 5.30 बजे वित्त मंत्री मेरे घर पर एक मीटिंग के लिए आने वाली हैं, और मैं उनको रिक्वेस्ट करने वाला हूं। आने वाले समय में डीजल से जो भी इंजन चलाते हैं उसके ऊपर अतिरिक्त 10 फीसदी जीएसटी लगाओ। ताकि जल्द ही इसका ट्रांसफॉर्मेशन होगा, नहीं तो लोग जल्दी सुनने के मूड में नहीं हैं।

वाहन निर्माताओं से किया अनुरोध
केंद्रीय मंत्री ने वाहन निर्माताओं से अनुरोध किया कि वह पेट्रोल और डीजल की जगह वैकल्पिक ईंधन के साथ ही इलेक्ट्रिक और अन्य तकनीक वाले वाहनों को देश में ज्यादा से ज्यादा लाएं। जिससे प्रदूषण को कम किया जा सके।

कार्यक्रम के बाद मीडिया से क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम में डीजल इंजन पर अतिरिक्त 10 फीसदी जीएसटी लगाने को लेकर पहले दिए बयान के बाद दोबारा से बयान दिया। दूसरी बार उन्होंने कहा कि 2014 के बाद जो 22 पर्सेंट डीजल की गाड़ियां थीं, वह 18 पर्सेंट पर आई हैं। अब जैसे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बढ़ रही है वैसे गाड़ियां नहीं बढ़नी चाहिए। आप भी अपने स्तर पर निर्णय करिए, ताकि डीजल वाहन कम से कम हों। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं वित्त मंत्री को सिफारिश करुंगा कि डीजल ज्यादा प्रदूषण कर रहा है। इसके ऊपर 10 फीसदी टैक्स अतिरिक्त लगाना चाहिए।

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साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।