शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 09:27:17 AM

ताजमहल पर हिन्दू महासभा से जुड़े दो युवकों ने चढ़ाया गंगा जल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. सावन में शनिवार को दो युवकों ने ताजमहल में गंगाजल चढ़ाया। वह पानी की बोतल में गंगाजल लेकर पहुंचे थे। मुख्य मकबरे में स्थित तहखाने के दरवाजे पर युवक ने गंगाजल चढ़ाया। दरवाजे से तहखाने में स्थित कब्रों तक जाने को सीढ़ियां बनी हैं। हिंदूवादी संगठन ताजमहल को शिव मंदिर तेजोमहालय मानते हैं। इसे लेकर कई याचिकाएं अदालत में विचाराधीन हैं। सावन में ताजमहल को हिन्दू मंदिर बताते हुए उसकी आरती करने और जलाभिषेक करने की मांग समय-समय पर उठती रही हैं। सावन के सोमवार को कुछ वर्ष पूर्व तक शिवसैनिक यमुना किनारे से ताजमहल की आरती उतारा करते थे।

कांवड़ लेकर पहुंची थी महिला

सोमवार को अखिल भारत हिन्दू महासभा की मीरा राठौर कांवड़ लेकर ताजमहल पहुंच गई थीं। पुलिस ने आरके फोटो स्टूडियो बैरियर से उन्हें आगे नहीं जाने दिया था। शनिवार सुबह दो युवक ताजमहल पहुंचे। एक के हाथ मे पानी की बोतल थी और दूसरा वीडियो बना रहा था। मुख्य मकबरे में कब्रों वाले कक्ष में प्रवेश करने से पूर्व युवक तहखाना के दरवाजे पर रुक गया। यहां उसने बोतल में भरे गंगाजल से अभिषेक किया। युवक को ऐसा करते हुए और दूसरे को वीडियो बनाते हुए देखने पर सीआईएसएफ के जवानों ने पकड़ लिया। पूछताछ के बाद दोनों को पुलिस को सौंप दिया।

अखिल भारत हिन्दू महासभा ने ली जिम्मेदारी

अखिल भारत हिन्दू महासभा ने इसकी जिम्मेदारी ली है। महासभा के विनेश चौधरी और श्याम को ताजमहल में गंगाजल चढ़ाने पर पकड़ा गया है। दोनों कांवड़ लेकर शुक्रवार रात मथुरा पहुंचे थे। शनिवार सुवह ताजमहल पहुंचकर उन्होंने गंगाजल चढ़ाया। हिन्दू महासभा के मंडल अध्यक्ष मनीष पंडित और राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय जाट ने कहा कि तेजोमहालय में गंगाजल चढ़ाना हिंदू महासभा का जन्मसिद्ध अधिकार है। आगे भी तेजोमहालय में कांवड़ और गंगाजल से अभिषेक होते रहेंगे।

पानी की बोतल ले जाने की है अनुमति

ताजमहल में खाने का सामान ले जाना प्रतिबंधित है, लेकिन पानी की बोतल ले जाने पर कोई रोक नहीं है। इसी का फायदा युवकों ने उठाया। वह पानी की बोतल में गंगाजल ले गए और किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी।

- Advertisement -

साभार : दैनिक जागरण

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।